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स्पीकर देवनानी बोले- धर्मांतरण इंटरनेशनल साजिश राजस्थान में: कमजोर जगह चुनती है देश विरोधी ताकतें, कानून अटकाया कॉंग्रेस ने /#राजस्थान

बाड़मेर

बाड़मेर पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्ताओं व नेताओं ने स्पीकर देवनानी का स्वागत किया।

भरतपुर में हाल ही सामने आए धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा- यह धर्मांतरण नहीं बल्कि राष्ट्रांतरण है। यह गंभीर मामला है। चिंताजनक और पीड़ादायक है। देश विरोधी ताकतें भारत को कमजोर करना चाहती हैं। वसुंधरा सरकार में धर्मांतरण रोकने को लेकर कानून बनाया था लेकिन गत सरकार ने 5 साल तक इस कानून को अनदेखा किया।

विधानसभा अध्यक्ष रविवार को जयपुर से सांचौर जाने के लिए विशेष विमान से रवाना हुए। वे सुबह 11.30 बजे बाड़मेर से 15 किलोमीटर दूर उतरलाई एयरफोर्स स्टेशन उतरे। जहां से सड़क मार्ग से सांचौर जाने के दौरान बाड़मेर शहर के अंबेडकर सर्किल रुके।

यहां बाड़मेर विधायक प्रियंका चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप पालीलाल, पूर्व जिलाध्य स्वरूप सिंह खारा, भाजपा नेता ललित बोथरा, चौहटन प्रधान रूपाराम सारण आदि ने विधानसभा अध्यक्ष का स्वागत किया। विधानसभा अध्यक्ष ने भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। वे यहां 20 मिनट रुके और मीडिया से बात की। इसके बाद लगभग 1 बजे सांचौर जिलाध्यक्ष के बेटे के शादी समारोह में जाने के लिए रवाना हो गए।

बाड़मेर के अंबेडकर सर्किल पर विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी ने भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को फूलमाला पहनाई। उनके साथ बाड़मेर विधायक प्रियंका चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप पालीवाल व अन्य भाजपा नेता।

बाड़मेर के अंबेडकर सर्किल पर विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी ने भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को फूलमाला पहनाई। उनके साथ बाड़मेर विधायक प्रियंका चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप पालीवाल व अन्य भाजपा नेता।

धर्मांतरण रोकने के लिए बने कठोर कानून

धर्मांतरण पर एक सवाल के जवाब में स्पीकर देवनानी ने कहा- वसुंधरा सरकार के दौरान बने कानून को लेकर पिछली गहलोत सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। ऐसे मामले विधानसभा में भी उठे। मैंने भी उठाया। लेकिन पिछली कांग्रेस सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की, इससे आरोपियों को प्रोत्साहन मिलता रहा। वर्तमान सरकार से मेरा आग्रह है कि धर्मांतरण को लेकर कानून को संशोधित कर राजस्थान में कठोर कानून बनाएं।

उन्होंने कहा कि लोगों को लालच देकर धर्मांतरण करने वाली ताकतें देश विरोधी हैं। इनके पीछे इंटरनेशनल और राष्ट्र विरोधी ताकतें भारत को कमजोर करना चाहती हैं। यह पहले से सक्रिय हैं। लेकिन अब केंद्र में सरकार मजबूत है। कई प्रांतों में डबल इंजन की सरकार है। काफी हद तक ऐसे मामलों में कमी आई है और रोक लगी है। राजस्थान में भी ऐसे मामलों में कमी आएगी। सीमावर्ती इलाके राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए ऐसे क्षेत्रों पर अधिक प्रहार किया जाता है। हमने इन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा- धर्मांतरण जैसे मामलों को रोकने के लिए कठोर कानून के साथ-साथ स्वंयसेवी संस्थाओं को भी आगे आकर इनके खिलाफ माहौल बनाना होगा। धर्मांतरण करने के पीछे जो भी कारण हों, उन्हें समझकर उन पर काम करना होगा। बीते 10 साल में लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं। इससे भी धर्मांतरण के मामलों में कमी आएगी।

स्कूलों को टारगेट करने के सवाल पर देवनानी बोले कि शिक्षामंत्री ने बहुत कुछ किया है। शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ज्यादा समस्या नहीं है।

बाड़मेर के अंबेडकर सर्किल पर चौहटन प्रधान रूपाराम सारण (लाल कुर्ते में) और बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का स्वागत किया।

बाड़मेर के अंबेडकर सर्किल पर चौहटन प्रधान रूपाराम सारण (लाल कुर्ते में) और बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का स्वागत किया।

क्या है भरतपुर धर्मांतरण मामला

भरतपुर में दो सप्ताह पहले धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया था। यहां ईसाई मिशनरी के 15 लोग साढ़े तीन सौ लोगों को धर्म परिवर्तन करा रहे थे। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद् (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुंच गए और सभा के वीडियो बना लिए। दोनों पक्षों में छीना-झपटी हुई और भगदड़ मच गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और 3 लोगों को हिरासत में ले लिया। मामला शहर के मथुरा गेट थाना इलाके का था।

क्या प्रयास किए थे वसुंधरा सरकार ने

राजस्थान धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2008 को मंजूर कराने के लिए राजस्थान की तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार ने कोशिश की थी। विधेयक 10 साल से अटका हुआ था। राष्ट्रपति से विधेयक की मंजूरी के लिए सरकार ने प्रयास किए थे। आचार संहिता लगने के लिए विधेयक पर कानून नहीं बन सका था। विधेयक में था कि धर्म परिवर्तन के लिए जिला कलेक्टर की मंजूरी लेनी होगी। जबरन या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने वाले को एक से तीन वर्ष की सजा का प्रावधान था। 25 हजार रुपए तक का जुर्माना का भी प्रावधान था। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों अथवा महिला या फिर अजा और जजा श्रेणी के व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराने पर आरोपियों को दो से पांच वर्ष की सजा के साथ ही 50 हजार रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान था।

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