
भोपाल। प्रदेश में अब माता-पिता की देखभाल नहीं करना सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को भारी पड़ेगा। ऐसी शिकायतें, सही पाए जाने पर सरकार वेतन में से एक निश्चित राशि काटकर सीधे माता-पिता के बैंक खाते में जमा कर देगी। यह राशि दस हजार रुपए से ज्यादा नहीं होगी। इस नियम के दायरे में केंद्र सरकार के वे अधिकारी-कर्मचारी भी आएंगे, जिन्हें राज्य शासन से वेतन मिल रहा है। सामाजिक न्याय विभाग ने माता-पिता भरण पोषण अधिनियम के नियमों में बदलाव कर दिया है। इसकी अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशन के लिए विभाग ने भेज दी है।विभाग के प्रमुख सचिव अशोक शाह ने बताया कि इस नियम के दायरे में राज्य सरकार के नियमित व संविदा कर्मचारियों के अलावा निगम, मंडल, अर्द्ध शासकीय निकाय, पंचायतीराज संस्था, स्थानीय निकाय और सरकार की अंशपूंजी वाली संस्थाओं के अधिकारी-कर्मचारी आएंगे। इसके साथ ही ऐसे केंद्रीय कर्मचारी को भी नियम की जद में रखा गया है, जिन्हें राज्य शासन वेतन देता है।
एसडीएम सुनेंगे शिकायत
सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हर जिले में एसडीएम ऐसे मामलों की सुनवाई करेंगे। इसके लिए एसडीएम को ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष घोषित किया गया है। शिकायत मिलने पर वे जांच कर निर्णय देंगे। इसके बाद सीधे संबंधित कर्मचारी के वेतन से राशि काटकर माता-पिता के खाते में जमा करा दी जाएगी। यह राशि दस हजार रुपए से ज्यादा नहीं होगी।






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