
इंटरनेशनल डेस्क.वैसे तो सेकंड वर्ल्ड वॉर की शुरुआत 1 सितंबर 1939 से हुई थी, जो छह सालों बाद सितंबर में ही 1945 में ही खत्म हुआ। लेकिन, दिसंबर (1941) का महीना इस जंग के लिए सबसे खतरनाक साबित हुआ था। क्योंकि, इसी दरमियान पर्ल हॉर्बर (7 दिसंबर) और नानजिंग नरसंहार (13 दिसंबर) जैसी बड़ी घटनाएं हुईं। इस दौरान नानजिंग चीन की राजधानी हुआ करती थी। 1937 में ही चीन की जापान से मुठभेड़ शुरू हो गई थी। इसके बाद जापानी सेना ने शंघाई पर कब्जा किया और 13 दिसंबर को चीन की राजधानी नानजिंग पर हमला कर दिया। ये युद्ध की असल शुरुआत थी, जब जापान की सेना ने नानजिंग शहर में महज छह हफ्तों में 3 लाख लोगों की जान ले ली थी। वहीं, करीब 80 हजार महिलाएं रेप का शिकार हुई थीं।
– चीन और जापान के बीच का युद्ध अब तक सेकंड वर्ल्ड वॉर का हिस्सा बन चुका था और जापान कमजोर पड़ने लगा था।
– हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमले के बाद जापान में 1945 में अपनी हार मान ली और सरेंडर कर दिया।
– चीन का दावा है कि इस युद्ध के दौरान चीन के नागारिकों और सैनिकों समेत कुल साढ़े तीन करोड़ लोग मारे गए थे।
– वहीं, जापान की डिफेंस मिनिस्ट्री के मुताबिक, जापान के 2 लाख सैनिक मारे गए थे।
– हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमले के बाद जापान में 1945 में अपनी हार मान ली और सरेंडर कर दिया।
– चीन का दावा है कि इस युद्ध के दौरान चीन के नागारिकों और सैनिकों समेत कुल साढ़े तीन करोड़ लोग मारे गए थे।
– वहीं, जापान की डिफेंस मिनिस्ट्री के मुताबिक, जापान के 2 लाख सैनिक मारे गए थे।






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