नया साल सामने खड़ा है। हमेशा की तरह इससे उत्साह, जीत और उमंग की उम्मीद की जाएगी। हाल ही में मप्र लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा- 17 के 10 टॉपर्स में छह महिलाओं का जगह बनाना और डिप्टी कलेक्टर के रूप में उनका चुना जाना भी नई उम्मीद है।
नया साल यह भी संदेश देता है कि अपेक्षाएं और उत्साह कम मत होने दीजिए। ज्यादातर टॉपर्स की सफलता की कहानी भी यही सीख दे रही है। ये टॉपर्स (तीन इंजीनियर) छोटी कामयाबी पर रुकी नहीं बल्कि उसे एक पड़ाव माना और आगे बढ़ती रहीं। नए साल के अवसर पर प्रस्तुत है टॉपर्स से उन चीजों के बारे में बातचीत जो उनके लिए प्रेरक बनीं।
संपदा सराफ
राज्य सेवा परीक्षा मेरिट की टॉपर डिप्टी कलेक्टर पद के लिए चयन
सफलता के पड़ाव : इंजीनियरिंग की पढ़ाई। 2016 में डीएसपी के रूप में चयन हुआ लेकिन रुकी नहीं। इस बार टॉपर बनीं, डिप्टी कलेक्टर चुनी गईं। अगला लक्ष्य आईएएस बनना।
जबलपुर निवासी संपदा कहती हैं- कभी भी किसी भी चीज की सीमा नहीं बनाई। जब डांस करने का मन हुआ तो डांस किया, जब विभिन्न गतिविधियों में जाने का मन किया तो उनका हिस्सा बन गई। एक अच्छे इंजीनियर के रूप में भी कॅरियर बना सकती थी, लेकिन प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य था जिसे पूरा किया। सफलता की कोई हद नहीं होती। आगे बढ़ने का प्रयास जारी रहेगा। डिप्टी कलेक्टर बनने के पीछे एक ही कारण है कि इस नौकरी से समाज से जुड़ने और लोगों की समस्याओं को दूर करने का मौका मिलता है।
परिवार ही प्रेरणा : पिता आदेश सराफ डिप्टी डायरेक्टर प्रोसिक्यूशन और मां नंदिनी महिला सशक्तिकरण में लॉ ऑफीसर हैं। संपदा कहती हैं सबसे अहम है बड़ों का साथ। इनका मार्गदर्शन ही लक्ष्य पाने के लिए प्रेरित करता है।
पढ़ाई के लिए कुछ छोड़ना नहीं चाहिए : कुछ लोग अन्य गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेते, उन्हें लगता है कि पढ़ाई पर असर पड़ेगा। लेकिन ऐसा नहीं है।
संपदा के लिए प्रेरक बात
हमेशा से ही कुछ ऐसा करना जिससे अलग पहचान बने।
रोचक पहलू
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान डांस, एनसीसी से जुड़ी रहीं। यहां भी सफलता मिली। एनसीसी में आरडीसी का हिस्सा बनीं। यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम में श्रीलंका गईं। अच्छी नृत्यांगना भी हैं।





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