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अजय बर्वे। मध्यप्रदेश के बैतुल का साइखेड़ा गांव। समय 3यह पहला मामला नहीं है। भोपाल का शक्तिकांड और सागर में नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसे जिंदा जलाने का मामला देशभर में चर्चा में रहा है। सागर वाले केस में तो पीड़िता की मौत भी हो गई।नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे देश में दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले मध्यप्रदेश में सामने आए हैं। 10 साल से मध्यप्रदेश अपनी सीमा से लगते अन्य राज्यों की तुलना में दुष्कर्म के मामले में सबसे ऊपर है।

1 दिसंबर की रात। घर में शौचालय अधूरा बना होने से 22 वर्षीय युवती खुले में शौच गई, इसी दौरान गांव के ही दो लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद बदनामी के डर से युवती ने फांसी लगा ली।
(नीचे चार्ट देखें)
दर्ज मामलों में सबसे अहम बात यह है कि ज्यादातर केस में पीड़िताओं के साथ दुष्कर्म करने वाले कोई अनजान नहीं, बल्कि उनके अपने रिश्तेदार या परिचित थे।2015 में मध्यप्रदेश में दुष्कर्म के 4391 मामले दर्ज हुए थे, जिनमें 94.8 प्रतिशत यानी 4161 आरोपी पीड़िताओं के रिश्तेदार निकले। वहीं महाराष्ट्र के 4144 मामलों में से 99.3 प्रतिशत पहचान वाले, पड़ोसी या रिश्तेदार थे।राजस्थान में भी 99.4 प्रतिशत (3644 में से 3622) आरोपी ऐसे ही रहे। इसी तरह उत्तरप्रदेश के 3025 मामलों से 2963, छत्तीसगढ़ के 1550 में से 1510 और गुजरात के 503 में से 500 आरोपी परिचित थे।
रेप के क्राइम रेट में छत्तीसगढ़ भी पीछे नहीं
– 10 साल से मध्यप्रदेश महिलाओं के खिलाफ होने वाले इस घिनौने अपराध (दुष्कर्म) के मामले में शीर्ष पर है। राज्य की प्रति 10 हजार की आबादी के हिसाब से औसत क्राइम रेट 0.44 है, जो 2016 में 0.66 तक पहुंच गई है।
– छत्तीसगढ़ में भी कुछ ऐसा ही ट्रेंड है। 2007 में 0.41 की क्राइम रेट की तुलना में 2016 में यह आंकड़ा 0.61 रहा।
– बीते 10 साल में यूपी में क्राइम की यह दर 0.25 से घटकर 0.22 हो गई है। गुजरात में क्राइम रेट 0.13 से 0.15 के बीच बनी हुई है।
– महाराष्ट्र में क्राइम रेट 2007 में जहां 0.13 पर थी, वहीं 2016 में यह लगभग तीन गुना होकर 0.35 पर पहुंच गई। ऐसे ही राजस्थान में भी 0.19 से लगभग दोगुना से ज्यादा होकर 2016 में 0.49 हो गई।
गुजरात बेहतर, यूपी सुधरा
साल 2016 में दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले (4828) मध्यप्रदेश में दर्ज हुए हैं। 4816 मामलों के साथ यूपी इस सूची में दूसरे नंबर है, वहीं 4189 मामलों के साथ महाराष्ट्र तीसरे पायदान पर है। राजस्थान में भी दुष्कर्म के 3656 मामले दर्ज हुए हैं। छत्तीसगढ़ में 1626, जबकि गुजरात में 982 केस दर्ज हुए हैं।रेप के मामलों में 2015 में भी मध्यप्रदेश टॉप पर था। तब मध्यप्रदेश में 4391, तो महाराष्ट्र में 4144 केस रिकॉर्ड हुए थे। राजस्थान और उत्तर प्रदेश में क्रमशः 3644 और 3025 केस दर्ज हुए थे।
2016 में बढ़े दुष्कर्म के मामले
– महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि 2016 में कुल 3,38,954 मामले दर्ज हुए हैं।
इनमें 38,947 मामले तो सिर्फ दुष्कर्म के हैं, जबकि यौन शोषण और यौन हमलों के 84,746 हजार मामले अलग हैं।
कड़े फैसले भी बेअसर
भोपाल सामूहिक दुष्कर्म के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने एक विधेयक पास किया है जो नाबालिग बच्चियों के साथ होने वाली ऐसी हैवानीयत को अंजाम देने वालों को मौत की सजा देने का काम करेगा।भले ही राज्य सरकार ने इतना बड़ा कानून बना लिया हो, लेकिन ऐसा लगता नहीं कि अपराधियों में कानून का कोई डर है। बिल पास होने के बाद हुई सागर और बैतुल सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं इस बात का ताजा उदाहरण हैं।
भरोसे का ना उठा पाएं फायदा
महिला सशक्तिकरण ग्रुप ज्वाला की डॉ. दिव्या गुप्ता के अनुसार, ‘मध्यप्रदेश में अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा केस दर्ज हो रहे हैं। इसका मतलब लोगों में इन घटनाओं को दबाने की प्रवृत्ति कम हुई है और वो आरोपियों को सजा दिलाने के लिए आगे आने लगे हैं। अन्य राज्यों में भी इस तरह की घटनाएं होती हैं जिन्हें दबा दिया जाता है जिसके चलते वहां मामले कम दर्ज होते हैं।’परिचितों द्वारा सबसे ज्यादा दुष्कर्म किए जाने पर डॉ. दिव्या कहा, ‘हम इसके लिए महिलाओं और युवतियों को इस बात के लिए जागरूक करते हैं कि वो रिश्तेदारों और परिचितों को समझे। कई बार भरोसे का फायदा उठाकर गलत हरकत करते हैं। बेटियां अपनी मां को बताती हैं कि उनका रिश्तेदार उनके साथ गलत हरकत करने की कोशिश कर रहा है लेकिन उसे नजरअंदाज किया जाता है। ऐसे में मांओं और बेटियों को सतर्क होना होगा और किसी भी ऐसी बात पर आवाज उठानी होगी।’प्रदेश सरकार के कानून को लेकर डॉ. गुप्ता का कहना है कि इससे लोगों में डर आएगा और एक दो घटनाओं में कड़ी सजा होने के बाद लोग इस तरह के अपराध करने से डरने लगेंगे।
देश के नक्शे पर सेवन सिस्टर्स बेहाल
मध्यप्रदेश नहीं बल्कि देश की सेवन सिस्टर्स के नाम से मशहूर नॉर्थ ईस्ट के सात राज्यों में भी महिलाओं की स्थिति खास नहीं है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा में दुष्कर्म के मामले तेजी से सामने आए हैं।
इन सातों राज्यों में सबसे खराब स्थिति मिजोरम की है, जहां 2007 से लेकर 2015 तक क्राइम रेट 0.51 से ऊपर रही और 2014 में तो यह 1.07 तक पहुंच गई थी। 2016 में कुछ कमी (0.20) आई है। अरुणाचल प्रदेश में भी क्राइम रेट 10 साल से लगातार 0.30 के ऊपर बनी हुई है।असम में क्राइम रेट में बढ़ोत्तरी हुई है, वहीं त्रिपुरा में यह 2007 के मुकाबले 2015 तक आधी हो गई, लेकिन 2016 में इसमें फिर बढ़त हुई। नगालैंड में 2007 के मुकाबले 2016 में यह बढ़कर दोगुना हो गई है। मणिपुर में भी क्राइम रेट में दोगुनी है।






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