भोपाल। शुक्रवार की सुबह राजधानी प्रवास पर आए भाजपा
के राष्ट्रीय अमित शाह का तीन दिवसीय दौरा रविवार रात को खत्म हो गया। शाह
के जाते ही प्रदेश के नेताओं ने राहत की सांस ली है। इन तीन दिनों में
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह ने नेताओं को नसीहत तो दी ही, साथ में छह
महीने का रोडमैप भी वे थमा गए, जिसकी समीक्षा के लिए वे फिर अगले साल की
शुरुआत में राजधानी आएंगे। कुल मिलाकर देखा जाए तो शाह ने भाजपा को चुनावी
मोड में डाल दिया है। लक्ष्य साफ है मिशन 2018 और 2019 में फतह।
पसीने छुटा दिए नेताओं के
राजधानी
पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने तीन दिन में सरकार और
संगठन स्तर पर मैदानी कार्यकर्ता से लेकर मंत्री-मुख्यमंत्री तक सभी के
कामकाज का आंकलन कर लिया। सार्वजनिक कार्यक्रमों को मिलाकर शाह ने 42 घंटों
में सोलह बैठकें लीं। पार्टी के मोर्चों की बैठक हो या पदाधिकारियों की,
शाह के पास मौजूद फीडबैक और उनकी तैयारी ने सभी के पसीने छुड़ा दिए।
शाह
के दौरे का मकसद साफ था कि अब तक जो हुआ उसे भूल जाओ लेकिन अब लापरवाही
मंजूर नहीं। सरकार को भी उन्होंने 100 नंबर देकर राहत जरूर दी, लेकिन
स्पष्ट कर गए कि अब सरकार अफसरों के भरोसे नहीं चलेगी। मंत्री दर्जा
प्राप्त नेताओं को भी नसीहत दी कि ऐशोआराम के दिन बीत गए, आप तो ये बताओ कि
संगठन को अब तक आपने क्या दिया।
कार्यकताओं की चिंता
शाह
प्रदेश के दौरे पर आने से पहले ही मध्यप्रदेश के बारे में पूरा फीडबैक ले
चुके थे। सांसद, विधायक और मंत्रियों को उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि पार्टी
में कार्यकर्ता ही सर्वोपरि है और उसकी चिंता कोई नहीं कर रहा है।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी से भी उन्हें अवगत करा दिया। वे यह भी कह गए कि
कोई भी मंत्री पड़ोस की एक विधानसभा सीट भी जिताने की स्थिति में नहीं है।
दिखेगा बदलाव
शाह
के दौरे में जो बात और कमजोरियां सामने आई हैं, उनके मुताबिक पार्टी में
बदलाव भी जल्द दिखाई देंगे। सरकार और संगठन के कामकाज पर नजर रखने के लिए
उन्होंने कोरग्रुप को न सिर्फ मजबूत किया, बल्कि अधिकार सम्पन्न् बना दिया
है। अब सत्ता और संगठन के फैसले लेने से पहले कोरग्रुप से हरी-झंडी लेना
पड़ेगी। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने भी कहा कि शाह ने
जो उम्मीद जताई है उसके मुताबिक बदलाव किए जाएंगे।
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