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मुझे मत बताओ नियम, मैं सब जानती हूं, रुपए रखे हैं मेरे बैग में उसका ध्यान कौन रखेगा,


ग्वालियर। मुझे नियम मत बताओ, अपने बोलने की टोन सुधारो। मैं सारे नियम जानती हूं। मेरे बैग में रुपए व कीमती सामान है, यदि चोरी हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा जीवाजी विश्वविद्यालय के परीक्षा भवन में गुरुवार को एक छात्रा कुछ इसी अंदाज में सहायक केंद्राध्यक्ष निमिषा जादौन से झगड़ बैठी। इतना ही नहीं आवेश में आकर छात्रा कक्ष से बाहर निकली और अपना बैग सहायक केंद्राध्यक्ष के पास फैंककर कहने लगी कि अब इसकी जिम्मेदारी आपकी है। परीक्षा दे रही छात्रा से इतना सुनने के बाद सहायक केंद्राध्यक्ष निमिषा जादौन भी उखड़ गईं। उन्होंने छात्रा को स्पष्ट शब्दों में चेता दिया कि वह नियम बाद में सिखाए, पहले अपना बैग नियत स्थान पर रखे। शांति से परीक्षा दे, इसी में उसकी भलाई है।
टोका वास्तव में छात्र को था
हुआ कुछ यूं कि जेयू परीक्षा भवन में आया एक छात्र बैग के साथ कमरे में घुस गया। सहायक केंद्राध्यक्ष निमिषा जादौन ने उसे देख लिया। उन्होंने इस मामले में कक्ष पर्यवेक्षकों को इस बात के लिए फटकार लगाई कि जब बैग लाने पर प्रतिबंध है तो फिर उन्होंने क्या देखा? सहायक केंद्राध्यक्ष की बात सुन छात्र अपना बैग लेकर कमरे से बाहर जा पाता उससे पहले ही पीजी डिप्लोमा इन योगा फर्स्ट सेमेस्टर की छात्रा किरण आनंद उखड़ गई। छात्रा का कहना था कि वह भी टीचर है,आप अपने बोलने का अंदाज सही करो। विवाद इतना बढ़ा कि साथी शिक्षक डॉ. सुनील मंडेरिया, केंद्राध्यक्ष प्रो. राजीव जैन को दखल देना पड़ा।
लिखा हुआ प्रश्न पत्र लिया वापस
इस घटना के तुरंत बाद कक्ष पर्यवेक्षकों का ध्यान छात्रा किरण आनंद के प्रश्न पत्र पर गया। छात्रा ने प्रश्न पत्र पर कुछ लिख रखा था। इस पर फिर विवाद हुआ। सहायक केंद्राध्यक्ष ने छात्रा का प्रश्न पत्र बदल दिया। छात्रा का कहना था कि उसके साथ बदले की कार्यवाही की जा रही है।
दूसरे पेपर में दूसरी बार टूटा नियम
26 दिसंबर से शुरू हुईं जीवाजी विश्वविद्यालय अध्ययनशाला की गुरुवार को दूसरी परीक्षा थी। इस परीक्षा में भी प्रवेश पत्र की अनिवार्यता के नियम की धज्जियां उड़ते नजर आईं। मैथेमेटिक्स व कम्प्यूटर साइंस के तमाम विद्यार्थियों के सीसीई के अंक अपलोड न होने के कारण प्रवेश पत्र जनरेट नहीं हुए थे। विभाग प्रमुख रेणू जैन ने केंद्राध्यक्ष को फोन कर बताया कि उनकी परीक्षा नियंत्रक डॉ. राकेश कुशवाह से बात हो गई है, सभी छात्रों को बिना प्रवेश पत्र के ही परीक्षा में बैठाओ। इन छात्रों के अंक फीड नहीं हो सके हैं। उन्होंने छात्रों की पहचान के लिए अपने विभाग के एक कर्मचारी को भी भेज दिया।
नियम अब किस पर लागू होगा?
जेयू ने महीनेभर पहले प्रवेश पत्र की अनिवार्यता का नियम यह कहते हुए बनाया था कि इस व्यवस्था से सीसीई व प्रेक्टिकल परीक्षा के अंक अपलोड किए बिना पहले परीक्षा और बाद में अंकसूची को लेकर मचने वाला कोहराम खत्म हो जाएगा। जेयू का यह नियम कॉलेज विद्यार्थियों पर लागू होता उससे पहले ही यह विश्वविद्यालय अध्ययनशालाओं की परीक्षा में तार-तार हो गया। इस मामले में परीक्षा नियंत्रक डॉ. राकेश सिंह कुशवाह का कहना है कि बिना प्रवेश पत्र छात्रों को परीक्षा में शामिल करने उनसे कोई अनुमति नहीं ली गई है।
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