राज्यमंत्री राजू बाथम सहित विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधियों ने लिया संगोष्ठी में भाग

शिवपुरी-संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर की 126वीं जयंती के अवसर पर स्थानीय नवग्रह मंदिर एबी रोड़ पर स्थित पार्क में अंबेडकर स्मारक स्थल पर राज्यमंत्री राजू बाथम सहित अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा संगोष्ठी आयोजित हुई। यहां राज्यमंत्री राजू बाथम ने कहा कि आज के समय में अंबेडकर जी के सिद्धांत हमारा जीवन मार्ग प्रशस्त करता है उन्होंने वंचित वर्ग के लिए जो कार्य किए वह अनुकरणीय है भारत के अनमोल रत्न में डॉ.बाबा साहेब सम्मानित हुए है यह गौरव का विषय है। इ इसके अलावा संगोष्ठी में प्रजापति महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हरज्ञान प्रजापति, समाजसेवी अमन गोयल, सिंधिया फैंस क्लब के शहर अध्यक्ष सिद्धार्थ सिंह चौहान, आदित्य ओमी व्यास, केशवदास जी, समाजसेवी श्रीमती वंदना गोयल, राजेश गोयल रजत, पत्रकार उमेश भारद्वाज, आनन्द गोयल, अभा ग्वाल महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू ग्वाल, बिरला सीमेंट के अधिकृत विक्रेता राजेन्द्र जैन, अजय पुरोहित, दिलीप उपाध्याय, अजमेर सिंह यादव, संजीव जैन, मनोज गौतम, अनिल राठौर, सारांश जैन, सौरभ जैन व कुलदीप जैन, रूप सिंह सेंगर सहित अनेकों संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने एबी रोड़ स्थित अंबेडकर पार्क स्मारक स्थल पहुंचकर संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके जीवन से जुड़े संस्मरणों को स्मृत किया। इस अवसर पर गोष्ठी का संचालन करते हुए राजेश गोयल रजत ने संचालन करते हुए कहा कि जात-पात-ऊॅंच-नीच की खाई को पाटने में डॉ.अंबेडकर का महत्वपूर्ण योगदान है उन्होंने सर्वहारा वर्ग का विकास किया और विकासोन्मुखी संविधान की रचना की। वहीं समाजसेवी अमन गोयल व हरज्ञान प्रजापति, सिद्धार्थ सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से कहा कि भारत के संविधान बनाकर डॉ.अंबेडकर का अमूल्य योगदान है उन्होंने जिस प्रकार से संविधान की रचना की वह अद्वितीय है ऐसे महान विभूति को शत्-शत् वंदन है हम उनके मूल्यों-सिद्धांतों को आत्मसात कर उनके सद्मार्ग पर चलने का संकल्प लेते है। इस अवसर पर संचालन कर रहे राजेश गोयल रजत ने सपत्निक श्रीमती वंदना गोयल के साथ अपने विवाह की वर्षगांठ पर भी बाबा साहेब को श्रद्धासुमन अर्पित किए ऐसे में यह प्रेरणादायी कार्य भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। इस अवसर पर अन्य लोग भी मौजूद रहे जिन्होंने अंबेडकर के जीवन से ओतप्रोत संबोधन दिया। अंत में सभी में प्रसाद स्वरूप फलों का वितरण किया गया।






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