था। सिंधिया परिवार को भी दिया गया था। इसके अलावा जो भी संपत्ति आज
सिंधिया परिवार पर है,उसके कोई तो दस्तावेज होने चाहिए। उनकी संपत्ति दो
दूनी पांच कैसे हो गई? जहां तक मेरी संपत्ति का सवाल है तो कांग्रेस खुद एक
जांच समिति बना ले,मैं उनके दफ्तर में जाकर जांच कराने को तैयार हूं।
यह
बात राज्यसभा सांसद प्रभात झा ने बुधवार को रेसकोर्स रोड स्थित अपने
शासकीय आवास पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। 22 सितम्बर तक सिंधिया
परिवार की संपत्तियों के खुलासे को लेकर उन्होंने कहा कि मैंने कहा था 22
के बाद । अब जल्द ,बहुत जल्द ही मैं 100 अरब सरकारी संपत्तियों को कैसे
निजी संपत्तियों में तब्दील किया गया,इसका खुलाशा करने जा रहा हूं। बताऊंगा
कि किस तरह कलेक्टरों की बदमाशी से लेकर अमले की कारगुजारियों के कारण
शासकीय संपत्ति निजी हो गई। गुना से चुनाव लड़ने की संभावना को लेकर
उन्होंने पार्टी क्या करेगी,ये पार्टी को तय करना है। मैं अपने बारे में तय
नहीं कर सकता हूं।
निजी जमीन में मरघट कहां से आ गया
शिवपुरी
की 622 बीघा जमीन का उदाहरण पेश करते हुए प्रभात झा ने कहा कि वहां जिस
जमीन को सिंधिया परिवार ने बाउंड्री कर कब्जे में लिया है,उस भूमि पर शमशान
है। पीडब्ल्यूडी की सड़कें है।
कहां फंसे हैं दलदल में
राजमाता
के पार्टी में किए गए योगदान पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान को लेकर
प्रभात झा ने कहा कि यह तो उन्हें सोचना है कि वह कहां दलदल में फंसे हैं।
यदि इतिहास में जाएंगे तो पता चलेगा कि जीवाजी राव सिंधिया हिंदू महसभाई,
राजमाता जनसंघ से,माधव राव सिंधिया भगवा टोपी पहन चुनाव लड़े। इस प्रश्न पर
कि क्या सिंधिया को ब्लैकमेल किया जा रहा है, उनका कहना था कि मैं तो यह
बता रहा हूं कि उन्हें कहां होना चाहिए था।
उपलब्धियों पर मौन
सिंधिया
परिवार द्वारा कोई एक धर्मशाला न बनवाए जाने की बात पर जब उनसे यह पूछा
गया कि पिछले 13 सालों से प्रदेश में भाजपा,3 सालों से केन्द्र में भाजपा
सरकार के रहते ग्वालियर को क्या ऐसा मिला जो दिखा सके। सांसद झा कोई सटीक
उत्तर नहीं दे सके। उनका कहना था कि लाड़ली लक्ष्मी योजना सहित सरकार की सभी
योजनाएं ग्वालियर के लिए भी हैं।





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