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अटेर उपचुनाव जीतने के बाद सिंधिया की शिवराज के खिलाफ हैट्रिक

पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में उपचुनाव में तीसरी जीत

शिवपुरी। मप्र में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के 14 वर्ष के कार्यकाल में प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव की चली आ रही परंपरा के तहत ग्वालियर चंबल संभाग में गोहद तथा शिवपुरी उपचुनाव के बाद यह तीसरा उपचुनाव कांग्रेस ने लगातार जीता है। अटेर चुनाव की कल मतगणना में कांग्रेस प्रत्याशी हेमंत कटारे ने भाजपा प्रत्याशी अरविंद ङ्क्षसह भदौरिया को कांटे के संघर्ष में 869 मतों से पराजित कर यह सिलसिला कायम रखा। जहां एक ओर गोहद उपचुनाव माखनलाल जाटव की हत्या के बाद सहानुभूति लहर के तहत कांग्रेस जीती थी, वहीं शिवपुरी विधानसभा उपचुनाव में भाजपा सरकार बनाम ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच हुए मुकाबले में सिंधिया को जीत मिली थी। यह चुनाव न सिर्फ एक उपचुनाव होकर सिंधिया के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाने वाला बन गया था वह भी श्री सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में। इस  उपचुनाव के रणयुद्ध में भी मतदाताओं ने श्री सिंधिया की प्रतिष्ठा को कायम रख कांग्रेस प्रत्याशी को जिताया था। अटेर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में हेमंत कटारे का उतरना तय था, परंतु भाजपा में उम्मीदवार चयन में काफी कसमकस रही, जहां अंतिम बाजी अरविंद भदौरिया के हाथ लगी। माना जा रहा था कि सत्ताधारी दल होने एवं जातिगत समीकरण के चलते भदौरिया को अच्छा प्रत्याशी माना जा रहा था, परंतु जिस रणनीति से एकजुट होकर सभी छोटे-बड़े कांग्रेस कार्यकर्ता तथा नेताओं ने यह चुनाव ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त कर लड़ा जिसमें पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ, सुरेश पचौरी, विवेक तनखा, अरुण यादव ने भी श्री सिंधिया को इस चुनाव में आगे रखा। श्री सिंधिया ने भी इस चुनाव को जीतने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और लगातार तीन दिन वहां रहकर 70 से अधिक छोटी-बड़ी सभाएं गांव-गांव तक दस्तक दी। सिंधिया की इस ताबड़तोड़ सभाओं और मतदाताओं से सतत संपर्क के चलते प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह ने तो एक चुनावी सभा में सिंधिया परिवार पर एक ऐसी टिप्पणी कर दी जिसको लेकर प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के भाजपा नेताओं तक को जबाव देना पड़ा। श्री सिंधिया ने इस उपचुनाव को पूरी गंभीरता से लेते हुए ठीक उसी तरह लड़ा जैसे वह खुद का चुनाव लड़ते हैं। चुनाव की घोषणा के बाद से तत्काल उन्होंने सेक्टर प्रभारियों एवं कार्यकर्ताओं को उनकी जिम्मेदारियां सौंपी और उन पर सीधा नियंत्रण रखा। इन सबका परिणाम यह हुआ कि हेमंत कटारे कांटे का संघर्ष होने के बावजूद जीत हासिल कर सके। 
चुनाव में सिंधिया रहे आक्रामक
अटेर उपचुनाव में यह जानते हुए कि उनका मुकाबला सत्ताधारी दल भाजपा से है, श्री सिंधिया ने प्रारंभ से ही अपने तेवर आक्रमक रखे और हर छोटी-बड़ी समस्या पर चुनाव आयोग से सीधा संपर्क रखा। क्षेत्र के कांग्रेस नेता लगातार चुनाव आयोग पर निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए दबाव बनाए रखे। सिंधिया एवं कांग्रेस के इस आक्रमक तेवर का परिणाम यह हुआ कि भिंड जिले के कलेक्टर एवं एसपी सहित कई अधिकारियों के स्थानांतरण हुए, जिसका सिलसिला मतदान के कुछ समय पूर्व तक जारी रहा। चुनाव आयोग की निष्पक्ष कार्यप्रणाली के चलते सरकार की कठपुतली बने कई अधिकारियों को चुनाव आयोग के चाबुक का सामना करना पड़ा। मतगणना के समय भी जब 15 वे राउण्ड के पास 16 वे राउण्ड से मतगणना का रिकॉर्ड गोपनीय रखा जाने लगा। तब श्री सिंधिया ने दिल्ली से सीधे जिला निर्वाचन अधिकारी तथा आयोग के प्रेक्षक से दो बार सीधी चर्चा कर इस संबंध में बातचीत की। श्री सिंधिया की सजगता का नतीजा यह हुआ कि अंतिम नतीजा हेमंत कटारे के पक्ष में आया और भले ही वे कम अंतर से जीतने में सफल हुए, लेकिन जीत उन्हीं की हुई। 
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