ग्वालियर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्मक्रमांक-1 पर एक मासूम बच्ची दोपहर में बैठी हुई मिली। बच्ची की उम्र करीब
डेढ़ साल है। बच्ची न तो कुछ बोल रही है और न ही उसके पास से ऐसी कोई चीज
मिली, जिससे उसकी पहचान हो सके। पहले आरपीएफ को लगा कि हो सकता है उसके
परिजन भूल गए हों, लेकिन दिनभर अनाउंसमेंट होता रहा फिर भी कोई उसे लेने
नहीं पहुंचा। अब आरपीएफ आशंका जता रही है कि हो सकता है परिजन ही बच्ची को
जानबूझकर छोड़ गए हों या फिर कोई बच्ची का अपहरण करके लाया हो।रेलवे
स्टेशन के प्लेटफॉर्म-1 पर दोपहर में सब इंस्पेक्टर अमित मीणा अन्य स्टाफ
के साथ गश्त कर रहे थे। वह उपस्टेशन अधीक्षक (परिचालन) कार्यालय के सामने
से गुजर रहे थे। उन्हें एक बच्ची बेंच पर बैठी हुई दिखी। उस समय उन्होंने
ध्यान नहीं दिया। कुछ देर बाद वहीं से वापस आए तो बच्ची वहीं बैठी हुई थी।
इसके बाद वह बच्ची के पास पहुंचे। पहले बच्ची के आसपास देखा, लेकिन कोई
नहीं मिला। बच्ची से बात करने का प्रयास किया, लेकिन वह कुछ भी नहीं बोल पा
रही है।
बच्ची की उम्र करीब डेढ़ वर्ष है। बच्ची जहां बैठी थी वहां
आसपास तलाशी ली, लेकिन कुछ नहीं मिला। फिर स्टेशन पर अनाउंसमेंट करवाया।
बच्ची को लेकर वह आरपीएफ पोस्ट लेकर पहुंचे। बच्ची को चिप्स, बिस्किट दिए।
खेलने के लिए बच्ची को खिलौने भी मंगवाए। दिनभर अनाउंसमेंट होता रहा, लेकिन
बच्ची को लेने कोई नहीं पहुंचा। इसके बाद शाम को चाइल्ड लाइन को सूचना दी।
बच्ची को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया।
ट्रेन रुकवाकर हर कोच में सूचना दी, फिर भी कोई नहीं मिला
बच्ची
जब बेंच पर बैठी मिली तो कुछ देर पहले ही आगरा-झांसी पैसेंजर ग्वालियर के
प्लेटफॉर्म-1 से रवाना हुई थी। ट्रेन के स्टाफ को सूचना दी और डबरा में
ट्रेन को करीब आधा घण्टा तक यहां रोका गया। आधा घण्टा रोककर हर कोच में
आरपीएफ ने यात्रियों को जाकर बताया। बच्ची का हुलिया भी बताया, लेकिन कोई
नहीं आया जो यह कह सके कि बच्ची उनकी है। इसके बाद ट्रेन रवाना करवा दी गई।





Be First to Comment