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श्रीमद् भागवत कथा का समापन 

करैरा। स्थानीय नई कालोनी में श्री आर डी श्रीवास्तव सेवा निवृत्त पंचायत इंस्पेक्टर द्वारा आयोजित श्री मद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया।

जिसमें समापन दिवस पर आयोजन में भागवत आचार्य श्री जगत गुरु रामानंदाचार्य श्री श्री 1008 स्वामी श्री बल्लभाचार्य जी महाराज ने सुदामा चरित्र पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि जब सुदामा दरिद्रता से बहुत परेशान थे तब वह अपने मित्र कृष्ण को याद करना नहीं भूलते थे। भगवान कृष्ण उनके बाल सखा हैं इस बात लोग उनका मजाक उड़ाने से नहीं चूकते थे । परंतु सुदामा कभी अपनी इस दशा से दुखी नहीं होते थे। अपनी पत्नी के कहने पर जब भगवान कृष्ण के राजमहल पहुँचे वहाँ भी द्वार पाल मजाक उड़ाने लगे किन्तु जब भगवान कृष्ण को मालूम हुआ कि उनका मित्र मुझसे मिलने आया है तो जैसे बैठे थे वैसे ही दौड़ पड़े और अपने मित्र को गले से लगा लिया। इस संवाद में श्रोताओं की आँखें अश्रुधारा बहाने लगीं। कथा में संत श्री योगेन्द्र दास जी महाराज संगीतमय भागवत कथा में राजा पारिक्षित शुकदेव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि राजा परीक्षित एक बार जंगल में आखेट के लिये गये प्यास लगने पर जलाशय की तलाश में आगे बढ़े तो वहीं शमीक ऋषि तपस्या कर रहे थे उन्होंने ऋषि से कुछ जानकारी चाही किन्तु कोई उत्तर न मिलने उन्होंने क्रोध में अपने वाण से अ के गले में मरा हुआ सर्प डाल दिया वह तो तपस्या में लीन थे उन्हें पता ही नहीं चला किन्तु ऋषि पुत्र ने देख लिया और उन्हें श्राप दे दिया। बाद में जब शमीक ऋषि को मालूम हुआ तो वह नाराज हुए और कहा कि पुत्र तुमने यह उचित नहीं किया किन्तु जब राजा परीक्षित को शाप की जानकारी हुई तो उन्होंने कहा कि ऋषि ने मुझे शाप देकर उपकार किया है अपराधी को अपराध का दंड मिलना हो चाहिए । आगे की कथा में राम जन्म श्री कृष्ण जन्मोत्सव, श्री गोवर्धन पूजा छप्पन भोग झांकी, रूकमणी मंगल, गोपी उद्धव संवाद, तथा सुदामा चरित्र के रोचक संवाद सुनने को मिले।

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