कोलारस। तहसील में अधिकारियो का रूतवा धीरे धीरे घटता जा रहा है। तहसीलदार नवनीत शर्मा के स्थानांतरण के बाद कोलारस राजस्व मेहकमा का ढर्रा इस तरह विगडा है कि कोई भी तहसीलदार व्यवस्थित रूप से तहसील कार्यालय का सही से संचालन नही कर पा रहा है। आज भी कोलारस तहसील में नायव तहसीलदार का पद रिक्त पडा हुआ है। वहीं नवीन रीडर और नवीन तहसीलदार के आने से कार्य को गति मिलने के बजाय पुराने रिकोर्ड के फैलारे को ही संभालने में खाशी मसक्कत करनी पड रही है। हालात यह रहे है कि राजस्व रिकॉर्ड में कई ऐसे प्रकरण जिंदा होकर आ रहे है। जिनका 5-5 साल बीत जाने के बाद भी कोई समाधान नही हो सका। बिना किसी कारण के अधिकारिक स्तर पर पुराने प्रकरणो को मनमाने रूप से निरस्त करने की कार्यवाही पूर्व में की गई है। इसी तरह का एक प्रकरण ग्राम रांछी भूमि सर्वेनम्बर 444व 445 एवं 454 का विगत पांच वर्ष पूर्व बटवारे का आवेदन लगाया गया था। किन्तु छोटा सा कारण बता कर उसे निरस्त कर दिया गया। ज्ञात हो की उक्त आवेदन भोपाल निवासी जमुना बाई पत्नि मजबूत सिंह धाकड ने तहसील कार्यालय में प्रस्तुत किया था। और राजस्व की तारीखो पर भी वह उपस्थित होती थी। किन्तु एक महिला को राजस्व विभाग द्वारा इस हद तक परेशान किया जा रहा है। कि उसका वटवारा वर्षो बीतने के बाद भी नही किया गया। इसी तरह तहसील न्यायालय में हरवन्त सिंह पुत्र किशन सिंह सिक्ख निवासी ग्राम हरीपुर द्वारा नामांतरण का प्रकरण दर्ज कराया था। जिसका प्रकरण क्रमांक 0181-2016-17-अ-6 के अंतर्गत आदेश हरवन्त सिंह के पक्ष में दिया गया था। इसी तारतम में अनुविभागीय अधिकारी महोदय द्वारा प्रकरण 177-2011-12 के द्वारा भी 20 जून 2017 को हरबन्त सिंह के पक्ष में आदेश जारी कर अमल करने को कहा गया। किन्तु तीन माह बीतने के बाद भी पटवारी द्वारा इस आदेश का अमल नही किया। तहसील में पदस्थ रीडर भी आदेश जारी होने के बाद किसी प्रकार का कोई कारण बताओ नोटिस पटवारियो को जारी नही कर रहे है। जिसके चलते कागजो के आदेश कम्प्यूटरो में अंकित नही हो पा रहे है। यही कारण है कि पटवारियो द्वारा पंजीयो को ही रिकॉर्ड रूप में जमा नही किया जा रहा है। केवल यही नही राजस्व विभाग के कई चौकाने बाले कारनामें सामने आ रहे है। पूर्व में मुआवजा वितरण मेंं राजेश रघुवंशी पुत्र नवल सिंह रघुवंशी के सर्वे नम्बर 1944,1991-2044 भूमि स्थित ग्राम लुकवासा का मुआवजा 6750 रूपयें पटवारी ने सांठ गांठ कर दूसरे के खाते में डाल दिये। इस संदर्भ में 14.09.2017 को एक आवेदन तहसीलदार महेन्द्र कथूरिया को दिया गया था। किन्तु सूखा राहत की राशि आज भी पीडित को नही मिल सकी है। एक और चौकाने बाला मामला राजस्व विभाग की अंदेखी का हमारे सामने आया है। जिसमें छोटे छोटे कम्प्यूटर संबंधी गलतियां जो पटवारियों द्वारा वर्ष 2012 में कागजी डाटा कम्प्यूटर दर्ज करते समय हुई थी। उनका पांच वर्ष बीतने के बाद भी सुधार नही हो सका है। इस संदर्भ में ग्राम टीला का एक मामला है। जिसमें मूल रजिस्ट्री अनुसार प्रार्थी का नाम बूंदा पत्नि जहार सिंह गुर्जर है। कम्प्यूटर में नामांतरण दर्ज करते समय बूंदा पत्नि जहार सिंह खंगार हो गया। उक्त सुधार करने के लिए केवल एक दिन ही काफी है। किन्तु इस सुधार को करने में दो तहसीलदारो के स्थानंातरण हो गये। और तीसरे तहसीलदार महेन्द्र कथूरियो को इस संदर्भ में एक माह पूर्व आवेदन दिया गया था। उन्होने पटवारी के लिए इस सुधार हेतु लिख भी दिया था। किन्तु टीला पटवारी द्वारा इस काम को अभी तक नही किया। ऐसे कई छोटे छोटे मामले है जिनसे राजस्व विभाग की उदासीन कार्य शैली का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालात यह है कि नवीन तहसील बनने के बाद भी पटवारी वहां नही बैठ रहे है। एसडीएम और तहसीलदार की तरह समान्तर रूप से अपने अपने कार्यालय निजी तौर पर संचालित कर रहे है। बाबू और पटवारी मनमाने तरीके से राजस्व संबंधी कार्यो को कर रहे है। सीधे सीधे लेन देन के कामो में रूचि दिखाई जा रही है। और शासन द्वारा जो आदेश दिये जा रहे है उन नामांतरण और बटवारा के निराकरण में कोलारस का राजस्व अमला फिसडडी साबित हो रहा है। यही नही कुछ हल्को मे तो हालात इतने खराब है कि पूर्व के कुछ तहसीलदारो ने निजी व्यक्तिओ से मिल कर उन हल्को के पटवारियो पर दबाब बना कर बडे बडे बटवारो, नामांतरणो को महज 10-10 दिन में लेन देने कर निवटा दिया कई पंजीयो पर तो बैक डेट में तैयार होने की खबर भी अंदर खाने से हमें प्राप्त हुई है। बर्तमान में भी बाबू पटवारियो और अधिकारिक अमले द्वारा ऐसे ही पुराने प्रकरणो में समाधान की रूचि दिखाई दी जा रही है। जिसमें हरियाली की सम्पूर्ण संभावना हो। यदि राजस्व रिकॉर्ड एवं पटवारियो के बस्तो की सही से जांच हो जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। हाला कि इस संदर्भ में हाल ही में मुख्य सचिव ने वरिष्ठ अधिकारियो को नियमित निरीक्षण का आदेश भी दिया है।
इनका कहना है।
हम राजस्व संबंधी कामो को बहुत गंभीरता से ले रहे है। यही नही मैं प्रतिदिन चार गांवो में जाकर निरीक्षण कर रहा हूँँ और पटवारियो के एक दर्जन से अधिक बस्तो की भी जांच की जा सकी है और आगे भी जारी है। यदि छोटे छोटे कामो में जनता को परेशान किया जा रहा है तो मैं संबंधित के खिलाफ कार्यवाही करने में कोई कसर नही छोडूंगा।
आर.ए. प्रजापति
एस.डी.एम. कोलारस
कोलारस में विभागी तौर पर भ्रष्टïचार जम कर चल रहा है। जिसकी समय समय पर मुझे जानकारी मिलती रहती है। जब भी में भोपाल जाता हूँँ तो वरिष्ठ अधिकारियों से सुधार हेतु चर्चा भी करता हूँ। राजस्व विभाग की जब भी कोई शिकायत मुझे प्राप्त हुई है। तो व्यक्तिगत रूप से मैने उसका समाधान कराया है। लेकिन जनता की सुविधा केे लिए छोटे छोटे कामो को करने में अधिकारियो को रूचि दिखानी चाहिऐं।
जितेन्द्र गोटू जैन
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिवपुरी





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