ग्वालियर । एजी पुल के नीचे से रविवारकी आधी रात को किसी ने 8 साल की दिव्यांग बच्ची का अपहरण कर लिया। घटना के
पांच घंटे बाद ही बदमाश ने बच्ची को अचलेश्वर मंदिर पर भीख मांगने के लिए
बैठा दिया। पुलिस अपहृत बच्ची को मुक्त कराने की पुष्टि कर रही है, लेकिन
अपहरणकर्ता के पकड़े जाने पर पुलिस अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। सूत्रों के
अनुसार आरोपी से एएसपी व सीएसपी ने 2 घंटे तक झांसी रोड थाने में पूछताछ
की। पुलिस को आरोपी की सुरागदेही पर और भी बच्चों के बरामद होने की उम्मीद
है।झांसी रोड स्थित एजी पुल के नीचे प्रेम मोटर्स के पास रामभजन
कुशवाह की झोपड़ी है। इसी झोपड़ी में वह चाय का होटल चलाते हैं। बड़ी बेटी के
अस्पताल में भर्ती होने के कारण उनकी छोटी बेटी भारती डबरा से रविवार की
रात को उसे देखने के लिए आई थी। भारती के साथ उसकी 8 साल की बेटी मंदो भी
आई थी। मंदो एक पैर और आंखों से दिव्यांग है। उसका पिता शंकर कुशवाह डबरा
में एक मिल में मजदूरी करता है।
बच्ची रात 1:30 बजे निकलकर सड़क पर आ गई
डबरा
से आई दिव्यांग बच्ची की रविवार की रात को 1:30 बजे के लगभग अचानक नींद
खुल गई। परिवार के लोगों को सोता छोड़कर बच्ची झोपड़ी से निकलकर सड़क पर आ गई
और संदिग्ध परिस्थतियों में गायब हो गई। रात 2 बजे मां भारती की नींद खुली।
बच्ची को बिस्तर पर नहीं देखकर वह घबरा गई। उसने बच्ची के नाना-नानी को
जगाकर मंदो को गायब होने के संबंध में बताया। पूरा परिवार आधी रात को झोपड़ी
के आसपास बच्ची की तलाश में जुट गया।
पुलिस के पेट्रोलिंग वाहन को सूचना दी
सोमवार
को तड़के 3 बजे के लगभग पुलिस का गश्ती दल झांसी रोड से पेट्रोलिंग करते
हुए निकला। नाना ने बच्ची के गायब होने की सूचना पुलिस को दी। पुलिस को
बताया कि वह बच्ची को आसपास काफी तलाश कर चुके हैं, लेकिन मिली नहीं है।
स्टेशन से अचलेश्वर तक तलाशा
पुलिस
ने रामभजन कुशवाह को गाड़ी में बैठाकर बच्ची को स्टेशन, बस स्टैंड से लेकर
फूलबाग व अचलेश्वर मंदिर तक तलाश किया। लेकिन बच्ची नहीं मिली। इसी बीच कुछ
लोगों ने बच्ची के परिजनों को बताया कि बच्ची सड़क क्रॉस कर वसंत विहार रोड
पर स्थित निजी हॉस्पिटल के सामने तक आ गई थी। इसी बीच एक युवक आया और उसको
अपनी बेटी बताकर गोद में उठाकर मोती महल की तरफ ले गया, जो कि काली शर्ट
पहने हुए हैं। उसके बाल छोटे-छोटे हैं।
आरोपी खड़े होकर मंगवा रहा था भीख
पुलिस
उजाला होने पर एक बार फिर गायब बच्ची के नाना को साथ लेकर तलाशने के लिए
निकली। पुलिस स्टेशन, बस स्टैंड से बच्ची को तलाश करती हुई अचलेश्वर मंदिर
पर पहुंची। बच्ची मंदिर के बाहर बैठकर भीख मांग रही थी। लोगों द्वारा बताए
गए हुलिया का युवक भी उसी के पास खड़ा था।
बच्ची के उठते ही नाना ने पहचाना
नाना
रामभजन कुशवाह ने बताया कि पहले तो वह दूर से बच्ची को नहीं पहचान पाए,
लेकिन बच्ची के उठते ही उसके पैर लचकाकर चलने से वह पहचान गए कि ये बच्ची
उसकी नातिन ही है। पुलिस ने तत्काल बच्ची को बरामद किया और युवक को पकड़कर
थाने ले आई।
2 घंटे बंद कमरे में पुलिस अधिकारियों ने की पूछताछ
सोमवार
की शाम को 4 बजे के लगभग एएसपी दिनेश कौशल, सीएसपी सुरेंद्र सिंह परमार व
टीआई दीपक यादव ने बंद कमरे में बच्ची के अपहरण के आरोप में पकड़े गए सोनपाल
निवासी भिंड से पूछताछ की। आरोपी नशे की हालत में है। अपने पिता का नाम तक
नहीं बता पा रहा है। आरोपी पेशे से ड्राइवर है। उसकी शादी नहीं हुई है। वह
इसी तरह से घूमता रहता है।
और बच्चों के बरामद होने की उम्मीद
पुलिस
ने अधिकारिक रूप से बच्ची के अपहरण करने वाले सोनपाल की गिरफ्तारी की
पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि आरोपी ने पुलिस के सामने
और बच्चों को बेचना कबूल किया है। पुलिस उसका नशा उतरने का इंतजार कर रही
है। नशा उतारने की दवा दिलाने के लिए पुलिस आरोपी को डॉक्टर के पास भी ले
गई थी।
बच्ची को बेचने के लिए 2 और लोगों को बुला लिया था
नाना
ने बताया कि मंदो के आवाज देने पर वह उन्हें पहचान गई और उनसे नाना कहकर
लिपट गई। रामभजन कुशवाह का कहना है कि अपहरणकर्ता के पास 2 और युवक खड़े थे
जो कि उससे बात कर रहे थे। पुलिस के पास पहुंचते ही उससे दूर हो गए और
पुलिस की नजर से बचकर गायब हो गए। उन्होंने आशंका जताई है कि अपहरणकर्ता ने
ही बच्ची का सौदा करने के लिए उन्हें मंदिर पर बुलाया था।
दिमागी बुखार से चली गई रोशनी
मां
भारती थाने के बाहर बच्ची को छाती से चिपकाकर खड़ी थी। मां ने बताया कि
उनकी बच्ची बचपन से ऐसी नहीं थी। हंसती-खेलती और दौड़ती थी, लेकिन 5 साल के
उम्र में उसके दिमाग में बुखार चढ़ गया। जिससे उसकी आंखों की रोशनी चली गई
और एक पैर से दिव्यांग हो गई। अपनी हैसियत के अनुसार उसका इलाज भी कराया।
लेकिन उसकी आंखों की रोशनी नहीं लौटी। मां बार-बार ईश्वर का धन्यवाद कर रही
थी। उसकी बेटी के जीवन में पहले से अंधकार है। अगर बच्ची नहीं मिलती तो न
जाने उसके साथ क्या होता।





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