
(शिवकांत सोनी) खनियाधाना। नगर के नंदीश्वर जिनालय चेतनबाग पर चल रहे 51 वें श्री वीतराग विज्ञान आध्यात्मिक शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर ज्ञानानंद महोत्सव के पांचवें दिन आज देश के ख्याति प्राप्त विद्वान व शिविरों के संस्थापक डॉ. हुकम चंद जी भारिल्ल का जन्मदिन संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर पूरे देश में फैले उनके हजारों शिष्यों में से भारी संख्या में शास्त्री विद्वान उपस्थित हुए व सभी ने आजीवन इस वीतरागी तत्वज्ञान को जन जन तक पहुँचाने की शपथ ली। इस अवसर पर हुए कार्यक्रम में डॉ. भारिल्ल के अलावा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गुणमाला भारिल्ल, प्रेमचंद जी बजाज कोटा, राकेश जैन -अनुपमा जैन दुबई, प्रकाश चंद जैन गुना, केवल चंद जैन बाड़ी, परमात्म प्रकाश भारिल्ल, अध्यात्म प्रकाश, प. अभिनंदन कुमार जी, प. अभय कुमार जी, प. राकेश जी, प. शांति पाटिल, प. संजय जैन मंगलायतन आदि अनेक लोग मंच पर मौजूद थे।
कार्यक्रम में पांडाल में उपस्थित हजारों लोगों की सभा में डॉ भारिल्ल जी द्वारा लगातार 60-70 वर्षो से पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी द्वारा प्रतिपादित तत्व ज्ञान के प्रचार प्रसार के लिए उनके योगदान को स्मरण किया गया व उनके द्वारा तैयार किये गए सैकड़ो शास्त्री विद्वानों ने इस कार्य को आजीवन जारी रखने की शपथ ली। राजुल गर्ल्स ग्रुप की बालिकाओं ने डॉ भारिल्ल द्वारा लिखित 82 पुस्तकों को लेकर यात्रा निकाली तथा शिविर आयोजन समिति व अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने उनका शॉल, श्रीफल भेंट कर एक वाल पेंटिग बना कर सम्मान किया। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुये डॉ हुकम चंद भारिल्ल ने कहा कि जन्मदिन तो उनके मनाये जाते हैं जिन्होंने इस जन्म मरण का नाश कर दिया है ये तो संकल्प का दिन है। हमने भी पूज्य गुरुदेवश्री कानजी स्वामी के देहावसान पर ये संकल्प लिया था कि जब तक ये देह रहेगी तब तक जिन शासन के इस तत्व ज्ञान को जन जन तक पहुंचाएगे और आज भी संकल्पित हैं। यही कार्य मेरे 850 शिष्य कर रहे हैं जिससे पंचम काल के अंत तक जिनशासन की ये पवित्र ध्वजा लहराती रहेगी। उन्होंने कहा कि मरण के समय धर्म करने का नाम समाधी मरण नहीं है बल्कि पूरे जीवन में धर्म रहेगा तभी उस जीव का समाधि मरण हो सकता है।






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