नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्वगवर्नर रघुराम राजन ने खुलासा किया है कि उन्होंने नोटबंदी का समर्थन नहीं
किया था। राजन ने कहा कि उन्होंने महसूस किया था कि इस तरह के विघटनकारी
निर्णय से जुड़ी अल्पावधि आर्थिक लागत किसी भी लंबी अवधि के लाभों से वंचित
कर देगी। राजन ने यह खुलासा अपनी एक किताब के जरिए किया है।
राजन
की किताब ‘आई डू वॉट आई डू’ आरबीआई गवर्नर के रूप में कई मुद्दों पर दिए
गए उनके भाषणों का संकलन है। हालांकि उन्होंने अपनी किताब में सबकुछ बताने
की कोशिश नहीं की है। उन्होंने अपने असहज संबंधों और वर्तमान सरकार के साथ
मतभेदों को आकर्षक ढंग से शार्ट इंट्रोडक्शन और पोस्टस्क्रिप्ट के जरिये
समझाने की कोशिश की है।
राजन ने कहा, “मेरे कार्यकाल के दौरान
कभी भी मुझसे नोटबंदी के बारे में निर्णय लेने के लिए नहीं कहा गया था।”
आपको बता दें कि राजन का कार्यकाल 5 सितंबर 2016 को पूरा हो गया था जबकि
नोटबंदी की घोषणा 8 नवंबर 2016 को की गई।
हाल ही में सामने आई
आरबीआई की सालाना रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार का नोटबंदी का फैसला सवालों
के घेरे में आ गया है। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने नोटबंदी के फैसले को
आड़े हाथों लिया था। सरकार के इस फैसले के बाद 9 नवंबर 2016 से ही 500 और
1000 रुपए के नोट अमान्य कर दिए गए थे। इसके बाद आरबीआई ने 500 और 2000
रुपए के नए नोट जारी किए थे।





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