
अतुल जैन , भोपाल-वैसे तो ग्वालियर चंबल संभाग में भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर हमेशा से रही है।लेकिन उसमें भी लहार से डॉक्टर गोविंद सिंह और पिछोर से के पी सिंह की लगातार जीतों से भाजपा नेता सकते में हैं।
इन सीटों पर भाजपा नेताओं का मुंह बन्द हो जाता है।इसलिए भाजपा भी इन सीटों पर बिल्कुल नए नामों पर दांव खेलने के मूड में है।चुनावों की रणनीति से जुड़े भाजपा के थिंक टैंक माने जाने वाले नेता ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि ने कि लहार से तेजतर्रार हिन्दू साध्वी के नाम पर पार्टी गम्भीरता से विचार कर रही है।उन्होंने शिवराज के सिपाहियों के सर्वे में खासतौर पर इसी बिंदु पर जोर है।वहीं दूसरी तरफ पिछोर विधानसभा जहां से अभी तक भाजपा से केवल वैश्य उम्मीदवार ही चुनाव जीत पाए हैं वहां भी वैश्य समाज की महिला उम्मीदवार के नाम पर विचार हो रहा है ,जो कि वयोवृद्ध नेता श्री लक्ष्मी नारायण जी गुप्ता द्वारा वरिष्ठ नेताओं को सुझाया गया है।पार्टी भी महिला उम्मीदवारों के नाम पर इसलिए विचार कर रही है कि एक तो भाजपा ने महिला उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने से महिला मोर्चा संतुष्ट हो जाएगा वहीं उम्मीदवार को यदि महिलाओं ने भी वोट कर दिया तो अप्रत्याशित परिणाम भी आ सकते हैं।पिछोर के बारे में जानकारों का मानना है कि वहां वर्तमान परिस्थितियों में वैश्य समाज का उम्मीदवार ही के पी सिंह को हरा सकता है क्योंकि उस पर सर्वसमाज का व्यक्ति भरोसा करता है। पिछोर में सबसे मजबूत लोधी और यादव समाज के दिग्गज भी यह मानने लगे हैं कि एक बार कैसे भी मिलकर सीट हथियाना अब जरूरी हो गया है। हारने की स्थिति में भी पार्टी का नुकसान तो है ही नहीं क्योंकि पुरुषों में भी किसी केंडिडेट के नाम पर एकराय नहीं बन पा रही है जो जीतता दिख रहा हो।पार्टी के रणनीतिकारों की माने तो इन विधानसभाओं में अचानक भेजे गए उम्मीदवार का क्या परिणाम हो सकता है इस पर मंथन जारी है।लेकिन ज्यादातर अनुभवी राजनेताओं का मानना है कि ऐसा होने पर दोनों जगहों पर चुनाव रोचक हो जाएंगे।






Be First to Comment