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बैराड़ नपं अध्यक्ष के पुत्र शासकीय लाभ लेने बनवाए तीन राशनकार्ड

कूटरचित दस्तावेजों से लगा चुका है शासकीय गुल्लक को चूना
जनसुनवाई में कलेक्टर के समक्ष आया मामला सामने

शिवपुरी। जनसुनवाई में आज बैराड़ के वार्ड क्रमांक 10 में निवासरत एक युवक नरेश चिड़ार ने नगर पंचायत अध्यक्ष सुशीला रावत के पुत्र सुनील रावत के खिलाफ फर्जी तरीके से तीन राशनकार्ड उपयोग में लाने की शिकायत की और मांग की है कि उक्त मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी कार्डधारी नगर पंचायत अध्यक्ष के पुत्र के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।
फरियादी नरेश चिड़ार ने कलेक्टर को दिए आवेदन में उल्लेख किया है कि नगर पंचायत बैराड़ के वार्ड क्रमांक 2 में रहने वाला सुनील रावत पुत्र दौलत सिंह रावत ने अपने राजैनतिक प्रभाव के चलते नगर पंचायतकर्मियों के साथ सांठ-गांठ कर फर्जी तरीके से तीन राशनकार्ड बनवा लिए हैं जिनसे वह शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त करता है और उक्त राशनकार्ड का उपयोग कर वह अपनी पत्नि नीलम रावत की शासकीय नौकरी में नियुक्ति कराना चाहता है। आवेदन में फरियादी ने यह भी बताया है कि सुनील के पास वार्ड क्रमांक 10 के दो राशनकार्ड और वार्ड क्रमांक 2 का एक राशनकार्ड है जिसका उपयोग वह  शासकीय योजनाओं में कर रहा है। आवेदन के माध्यम से फरियादी ने मांग की है कि उक्त मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। कुल मिलाकर बैराड की नपं अध्यक्ष सुशीला दौलत सिंह रावत के पुत्र सुनील रावत ने अपनी मां के पद का दुरूपयोग करते हुए कुटरचित दस्तावेज तैयार करवाए है।

पूर्व में वार्ड 2 में किया था आवेदन और अब 10 में किया आवेदन
शिकायतकर्ता ने बताया कि बैराड नपं अध्यक्ष कीपुत्र वधु ने बैराड के ही वार्ड क्रमांक 2 से महिला बाल विकास में कार्यकर्ता के लिए नौकरी के लिए फार्म भरा था। आवेदन के साथ सलंग्न किए गए कागजों में सुनील रावत पत्नि नीलम रावत को वार्ड कंमाक 2 का निवासी राशन कार्ड क्रमांक 2872 से खाता क्रमांक 73 से होना बताया है। लेकिन इसके बाद फिर बैराड के वार्ड क्रमांक 10 में कार्यकर्ता के आवेदन दिया है। नीलम रावत के नौकरी में किए गए कागजो में वार्ड क्रमांक 10 का निवासी राशन कार्ड क्रमांक 2872 व खाता क्रमांक 73 से होना बताया है।    जब सुनील रावत की पत्नि नीलम रावत का चयन महिला बाल विकास की कार्यकर्ता के रूप में बैराड के वार्ड क्रमांक में 2 में नही हुआ था तो इन्होने अपना आवेदन पुन: वार्ड क्रमांक 10 से भरा। खासबात यह है कि एक आवेदन में आवेदिका को वार्ड 2 का निवासी फिर दूसरे आवेदन में वार्ड 10 का निवासी दर्शाया गया है इससे स्पष्ट होता है कि किस तरह अपने राजनैतिक रसूख का फायदा उठाकर धोखाधड़ी की जा रही है।

पूर्व में भी बनाए थे कूटरचित दस्तावेज
शिकायतकर्ता ने बताया कि इससे पूर्व भी नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा कूटरचित दस्तावेज बनवाकर अपने रिश्तेदारों की शासकीय नौकरियों में नियुक्ति करवाई है।   इस मामले की याचिका समाजसेवी माखन सिंह धाकड़ द्वारा माननीय हाईकोर्ट में दायर की थी जिसका मामला अभी विचाराधीन है।

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