शिवपुरी। प्रदेश के नम्बर वन अस्पताल का खिताब हासिल कर चुके शिवपुरी के जिला अस्पताल में व्यवस्थायें पूरी तरह वेंटीलेटर पर आ गईं हैं। यहाँ पदस्थ चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ के बिगड़े बोल और मरीजों के साथ उनका व्यवहार आए दिन समस्या मूलक बन रहा है। आज ऐसा ही एक मामला उस समय सामने आया जब केन्द्रीय विद्यालय की कक्षा 9 की छात्रा की हालत बिगडऩे के चलते उसे अस्पताल लाया गया तो अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने उसे साँस देने के लिए ऑक्सीजन का खाली सिलेण्डर ही लगा दिया। अस्पताल प्रबंधन की इतनी बड़ी लापरवाही का जब परिजनों ने विरोध किया तो वहाँ मौजूद चिकित्सकीय स्टाफ उल्टे परिजनों पर ही बन बैठा और उन्हें ही खरी खोटी सुना डालीं। यहाँ तक कि परिजनों पर पुलिस कार्यवाही की धमकी भी दे डाली।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जम्मू कश्मीर में एलओसी पर पदस्थ सीआरपीएफ जवान अनुराग अवस्थी की पुत्री आंचल अवस्थी कक्षा 9 में केन्द्रीय विद्यालय में अध्ययनरत है। आज विद्यालय में आंचल अवस्थी की एकाएक हालत बिगड़ गई और उसे साँस लेने में तकलीफ होने लगी। विद्यालय प्रबंधन ने इस बात की सूचना उसके परिजनों को दी तो वे तत्काल आँचल को लेकर अस्पताल आए। आँचल की माँ कल्पना शर्मा जैसे ही पर्चा बनवाकर चिकित्सकों के पास पहुंची तो चिकित्सकों ने ऑक्सीजन का खाली सिलेण्डर ही लगा दिया और एक इंजेक्शन देकर बोतल चढ़ाते हुए ग्वालियर रैफर का पर्चा थमा दिया। बालिका के परिजनों ने बालिका की लगातार बिगड़ रही हालत की शिकायत जब डॉक्टरों से की तो चिकित्सकों ने आँचल की माँ के ऊपर पर्चा फेंकते हुए कहा कि हमने इसे ग्वालियर रैफर कर दिया आप इसे यहाँ से ले जाओ और यदि ज्यादा जल्दी है तो चिकित्सक घर से लाया करो। डॉक्टरों और नर्सों के इस व्यवहार का परिजनों ने विरोध किया तो वे पुलिस कार्यवाही की धमकी देने लगीं। आँचल के परिजन जब सीएस से इस बात की शिकायत करने पहुंचे तो सीएस ने भी अपना रटा रटाया कथन बोला और कहा कि आप देर मत करो इसे ग्वालियर ले जाओ मैं नर्सों की बैठक करके उन्हें समझाता हूं।
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परिजन लेकर आए सिलेण्डर तब मिली ऑक्सीजन
एक ओर जहाँ आँचल अवस्थी की हालत लगातार बिगड़ रही थी वहीं चिकित्सकीय स्टाफ डॉक्टर एवं नर्स एक केबिन में बैठकर अपने अपने मोबाइल में मशगूल थे, बालिका के परिजनों ने कई बार इनसे दूसरा सिलेण्डर लगाए जाने की बात कही मगर इन्होंने एक न सुनी, इनकी अनसुनी से त्रस्त बालिका के परिजन ही एम्बूलेंस संचालक से एक ऑक्सीजन सिलेण्डर लेकर आए इसके बाद आरएमओ श्री गुर्जर द्वारा बालिका का चैकअप कर उसे ऑक्सीजन दी गई तब कहीं जाकर बालिका ग्वालियर तक जाने की स्थिति में आ पाई।






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