आदेश को 15 दिन गुजरने के बाद भी जप सीईओ ने नहीं हटाया पद से
मामला बदरवास की ग्राम पंचायत गिंदोरा के सरपंच के फर्जीवाड़े का

शिवपुरी। बदरवास जनपद की ग्राम पंचायत गिंदोरा के सरपंच मोहब्बत सिंह आदिवासी के भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के मामले में अपील पर सुनवाई करते हुए कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव ने सरपंच को दोषी पाते हुए पद से पृथक करने के आदेश विगत 21 मार्च 2017 को आदेश जारी किया गया, लेकिन 15 दिन गुजरने के बाद भी जनपद पंचायत बदरवास सीईओ द्वारा अभी तक न तो सरपंच को पद से पृथक किया गया है और न ही सरपंच के वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाई गई है। कलेक्टर के आदेश के बाद भी सरपंच के पद पर बने रहने से अधिकारियों की कार्यप्रणाली कहीं न कहीं कठघरे में आ गई है क्योंकि आदेश को जारी हुए 15 दिन गुजर गए हैं। बताना होगा कि गिंदोरा सरपंच पर दो वर्ष पूर्व पंचायत के कार्यों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे। मामले की जांच कोलारस एसडीएम द्वारा की गई और करीब एक वर्ष बाद जांच में सरपंच को दोषी पाते हुए पद से पृथक करने के आदेश फरवरी 2016 में हुए थे, लेकिन तत्समय सरपंच द्वारा जिला दण्डाधिकारी शिवपुरी के यहां स्टे के लिए अपील प्रस्तुत की जिसमें कलेक्टर शिवपुरी द्वारा स्टे खारिज करते हुए प्रकरण को अपनी न्यायालय में सुनवाई के लिए विचाराधीन कर लिया। इसी विचाराधीन प्रकरण पर कलेक्टर ने सुनवाई करते हुए समस्त साक्ष्यों के आधार पर सरपंच को दोषी पाते हुए पद से पृथक करने के एसडीएम कोलारस के पूर्व आदेश को यथावत रखने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि मार्च 2015 में सरपंच द्वारा पंच परमेश्वर योजना में 3 लाख और रोजगार गारंटी योजना में 2 लाख 40 हजार रुपए का भ्रष्टाचार किया था। उसके बाद दिसम्बर 2015 में पंच परमेश्वर योजना में ही 2 लाख 68 हजार रुपए की अनियमितता उजागर हुई थी। जिसमें मामला सही पाते हुए एसडीएम द्वारा जनवरी 2017 में वसूली के आदेश जारी किए थे जिस पर अभी तक कोई वसूली नहीं की गई है। फरवरी 2017 में पुन: 3 लाख 42 हजार रुपए में भी अनियमितताएं सामने आई हैं, जिसकी शिकायत के बाद जांच अभी तक लंबित है। सरपंच द्वारा हर बार अग्रिम राशि का आहरण करते हुए कोई भी निर्माण कार्य को पूरा नहीं कराया गया।
अधिकारियों की हीलाहवाली से मिला कई बार भ्रष्टाचार करने का मौका
ग्राम पंचायत गिंदोरा निवासी जितेन्द्र सिंह रघुवंशी ने बताया कि सरपंच द्वारा भ्रष्टाचार की मेरे द्वारा कई बार शिकायतें जिला कलेक्टर, जिपं सीईओ, एसडीएम सहित जप सीईओ तक को की गई और जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद भी अधिकारियों द्वारा सरपंच पर अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई। इसके अलावा न ही अवैध रूप से आहरित की गई राशि को वसूल किया गया और न ही कोई ठोस कानूनी कार्यवाही की गई। जिसका परिणाम यह हुआ कि लगातार भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद भी सरपंच द्वारा अपना भ्रष्टाचार जारी रखा है। श्री रघुवंशी का कहना है कि यह सब अधिकारियों की सांठगांठ से ही किया जा रहा है और इसी के कारण सरपंच के हौंसले बुलंद बने हुए हैं। अगर अधिकारियों द्वारा पहली ही जांच में दोषी सिद्ध होने पर सख्त कार्यवाही की जाती तो शासन की योजनाओं की धन राशि खुर्दबुर्द होने से बच सकती थी।






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