सरपंच सेकेट्री खा गये शौचालय का बजट क्या मैं खुले में भी शौच नही कर सकता ग्रामीण: छन्नू यादव गुढ़ा

बदरवास। कोलारस परगने के अंतर्गत 134 ग्राम पंचायते कोलारस एवं बदरवास जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इनमें से कुछ पंचायतो को प्रशासन द्वारा पूर्ण रूप से खुले में शौच मुक्त करने का दाबा किया हैं। उन्ही में से एक पंचायत में जब हमारी टीम ने मौके पर जाकर रियल टेस्ट किया तो सुबह शाम क्या दिन में भी महिलाओ से लेकर पुरूष एवं बच्चे खुले में शौंच करते हुये पाये गये। चूकि महिलाओ की इज्जत के कारण हमने उनके फोटो एवं गांव अथवा उनके नाम उजागर करना संभव नही था। इस कारण हमने पूर्ण खुले में शौंच मुक्त एक पंचायत का जब जायजा लिया तो शौचालय न होने के कारण उक्त व्यक्ति दोपहर के समय खुले में शौंच करता हुआ मिला। ग्राम पंचायत गुढ़ा के कांग्रेस नेता छन्नू यादव से जब हमारी टीम ने चर्चा की तो उनका कहना था। कि सरपंच एवं सचिव गांव के आदिवासी, अहीर समाज के लोगो से 2 हजार रूपये ले गये। और बदले में शौचालय की जगह लोहे के ढिब्बे रख गये। जिनका उपयोग शौचालय की जगह कंडे रखने में किया जा रहा है। और गांव के विकलांग, महिलाये, लडकियां सहित अधिकांश गांव के लोग खुले में शौंच करने के लिए मजबूर है। यहां तक की हमारे द्वारा छेडे गये अभियान के बाद गुढ़ा में सचिव द्वारा लोगो को शौचालय बनाने के लिये 12000 रूपये शौचालय बनने के बाद देने की बात ग्रामीणो से रविवार को गुढ़ा पहुंच कर की किन्तु शौचालय बनाने के नाम पर हुयें लाखो के घोटाले पर अभी तक कोई भी कार्यवाही नही होने से घोटाले बाजो के हौंसले बुलंद है।
खुले में शौंच करने बाले व्यक्ति से जब हमने चर्चा करनी चाही तो उक्त व्यक्ति ने कहा कि सहाब हमारे नाम पर शौचालय का भुगतान सरपंच और सैकेट्री निकाल कर खा गये। और आप खुले में भी शौच करने में फोटो खींच रहेा हो तो भला हम शौच के लिए कहां जाये। उक्त व्यक्ति ने अपना नाम तो बताने में परहेज किया। किन्तु जिस गांव का वह व्यक्ति था। वह गांव प्रशासन से लेकर शासन के पास पूर्ण स्वच्छता सूचियो में शामिल है। जब पूर्ण स्वच्छ गांव की यह स्थिति है तो अन्य गांवो की क्या स्थिति होगी। इसका अंदाजा अंधा व्यक्ति भी भली भांति लगा सकता है। कि भ्रष्टाचार के खेल में भिष्टïा खाने बाले लोगो को शौच के नाम पर मिलने बाला 12 हजार रूपये का बजट डकार जाते है उसके ऊपर से लोगो से शौचालय बनाने के नाम पर लोगो से गडढे एवं 2 हजार रूपये सेवा शुल्क भी ले लेते है। उक्त रियल टेस्ट ग्राम पंचायत गुढा, देहरदा, वेहटा, सेसई सहित कई पंचायतो में जाकर लिया गया। जिनमें से अधिकांस गांवो में यही स्थिति देखने को मिली।
बॉक्स
ग्राम पंचायत गुढा में हुआ भिष्टïा के नाम पर महा-भिष्टïा

कोलारस जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने बाली ग्राम पंचातय गुढा का राज-एक्सपे्रस की टीम द्वारा 20 नबम्बर को गुढा में शौचालय की स्थिति का जायजा लिया तो गुढा में लोगो ने बताया कि हम से सचिव 2 हजार रूपये ले गया। और शौचालय के स्थान पर लोहे के डिब्बे रख गया। जिसका कोई उपयोग हम नही कर पा रहे है। गांव के जिन घरो में 2 हजार रूपये लेकर सचिव एवं सरपंच द्वारा लोहे के डिब्बे रखे गये है। वह लोग खुले में शौच को जाने के लिए मजबूर है। उक्त मामले की खबर के बाद कोलारस एसडीएम को लिखित शिकायत की गई। ग्राम पंचायत गुढ़ा के अहीर मोहल्ले में ऊधम सिंह, श्रवण कुमार, सुजान सिंह, लक्ष्मण सिंह के अलावा आदिवासी मोहल्ले में विजय एवं बादाम के निवासो पर जाकर जब देखा गया। तो शौचालय के स्थान पर पंचायत के सरपंच एवं सचिव ने उन्ही से बसूले 2 हजार रूपये के लोहे के डिब्बे घरो के अंदर स्थापित कर दिये। जिनमें न तो शौचालय के गटर यानि कि गडढे और न ही शौच जाने के लिए सीट रखी गई। जिसके चलते उक्त डिब्बो का उपयोग शौचालय की जगह बॉक्स के रूप में किया जा रहा है। और ग्राम पंचायत गुढ़ा के अधिकांश अहीर मोहल्ला एवं गुढ़ा के नीचे तथा ऊपर दोनो मोहल्लो में निवास करने बाले आदिवासी समाज की महिलाओ से लेकर लडकियां खुले में शौच करने के लिए मजबूर है। और शौचालय के नाम पर मिले फंड को सरपंच सचिव से लेकर संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मिल बांट कर डकार गये। और शिकायत होने के बाद भी कार्यवाही करने की जगह उक्त मामले को लटकाने का कार्य चंद नेताओ, दलालो के पे्रेशर में प्रशासन कर रहा है।
बदरवास। कोलारस परगने के अंतर्गत 134 ग्राम पंचायते कोलारस एवं बदरवास जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इनमें से कुछ पंचायतो को प्रशासन द्वारा पूर्ण रूप से खुले में शौच मुक्त करने का दाबा किया हैं। उन्ही में से एक पंचायत में जब हमारी टीम ने मौके पर जाकर रियल टेस्ट किया तो सुबह शाम क्या दिन में भी महिलाओ से लेकर पुरूष एवं बच्चे खुले में शौंच करते हुये पाये गये। चूकि महिलाओ की इज्जत के कारण हमने उनके फोटो एवं गांव अथवा उनके नाम उजागर करना संभव नही था। इस कारण हमने पूर्ण खुले में शौंच मुक्त एक पंचायत का जब जायजा लिया तो शौचालय न होने के कारण उक्त व्यक्ति दोपहर के समय खुले में शौंच करता हुआ मिला। ग्राम पंचायत गुढ़ा के कांग्रेस नेता छन्नू यादव से जब हमारी टीम ने चर्चा की तो उनका कहना था। कि सरपंच एवं सचिव गांव के आदिवासी, अहीर समाज के लोगो से 2 हजार रूपये ले गये। और बदले में शौचालय की जगह लोहे के ढिब्बे रख गये। जिनका उपयोग शौचालय की जगह कंडे रखने में किया जा रहा है। और गांव के विकलांग, महिलाये, लडकियां सहित अधिकांश गांव के लोग खुले में शौंच करने के लिए मजबूर है। यहां तक की हमारे द्वारा छेडे गये अभियान के बाद गुढ़ा में सचिव द्वारा लोगो को शौचालय बनाने के लिये 12000 रूपये शौचालय बनने के बाद देने की बात ग्रामीणो से रविवार को गुढ़ा पहुंच कर की किन्तु शौचालय बनाने के नाम पर हुयें लाखो के घोटाले पर अभी तक कोई भी कार्यवाही नही होने से घोटाले बाजो के हौंसले बुलंद है।
खुले में शौंच करने बाले व्यक्ति से जब हमने चर्चा करनी चाही तो उक्त व्यक्ति ने कहा कि सहाब हमारे नाम पर शौचालय का भुगतान सरपंच और सैकेट्री निकाल कर खा गये। और आप खुले में भी शौच करने में फोटो खींच रहेा हो तो भला हम शौच के लिए कहां जाये। उक्त व्यक्ति ने अपना नाम तो बताने में परहेज किया। किन्तु जिस गांव का वह व्यक्ति था। वह गांव प्रशासन से लेकर शासन के पास पूर्ण स्वच्छता सूचियो में शामिल है। जब पूर्ण स्वच्छ गांव की यह स्थिति है तो अन्य गांवो की क्या स्थिति होगी। इसका अंदाजा अंधा व्यक्ति भी भली भांति लगा सकता है। कि भ्रष्टाचार के खेल में भिष्टïा खाने बाले लोगो को शौच के नाम पर मिलने बाला 12 हजार रूपये का बजट डकार जाते है उसके ऊपर से लोगो से शौचालय बनाने के नाम पर लोगो से गडढे एवं 2 हजार रूपये सेवा शुल्क भी ले लेते है। उक्त रियल टेस्ट ग्राम पंचायत गुढा, देहरदा, वेहटा, सेसई सहित कई पंचायतो में जाकर लिया गया। जिनमें से अधिकांस गांवो में यही स्थिति देखने को मिली।
बॉक्स
ग्राम पंचायत गुढा में हुआ भिष्टïा के नाम पर महा-भिष्टïा
कोलारस जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने बाली ग्राम पंचातय गुढा का राज-एक्सपे्रस की टीम द्वारा 20 नबम्बर को गुढा में शौचालय की स्थिति का जायजा लिया तो गुढा में लोगो ने बताया कि हम से सचिव 2 हजार रूपये ले गया। और शौचालय के स्थान पर लोहे के डिब्बे रख गया। जिसका कोई उपयोग हम नही कर पा रहे है। गांव के जिन घरो में 2 हजार रूपये लेकर सचिव एवं सरपंच द्वारा लोहे के डिब्बे रखे गये है। वह लोग खुले में शौच को जाने के लिए मजबूर है। उक्त मामले की खबर के बाद कोलारस एसडीएम को लिखित शिकायत की गई। ग्राम पंचायत गुढ़ा के अहीर मोहल्ले में ऊधम सिंह, श्रवण कुमार, सुजान सिंह, लक्ष्मण सिंह के अलावा आदिवासी मोहल्ले में विजय एवं बादाम के निवासो पर जाकर जब देखा गया। तो शौचालय के स्थान पर पंचायत के सरपंच एवं सचिव ने उन्ही से बसूले 2 हजार रूपये के लोहे के डिब्बे घरो के अंदर स्थापित कर दिये। जिनमें न तो शौचालय के गटर यानि कि गडढे और न ही शौच जाने के लिए सीट रखी गई। जिसके चलते उक्त डिब्बो का उपयोग शौचालय की जगह बॉक्स के रूप में किया जा रहा है। और ग्राम पंचायत गुढ़ा के अधिकांश अहीर मोहल्ला एवं गुढ़ा के नीचे तथा ऊपर दोनो मोहल्लो में निवास करने बाले आदिवासी समाज की महिलाओ से लेकर लडकियां खुले में शौच करने के लिए मजबूर है। और शौचालय के नाम पर मिले फंड को सरपंच सचिव से लेकर संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मिल बांट कर डकार गये। और शिकायत होने के बाद भी कार्यवाही करने की जगह उक्त मामले को लटकाने का कार्य चंद नेताओ, दलालो के पे्रेशर में प्रशासन कर रहा है।





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