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बिल्लियों से खौफजदा है भोपाल का सुल्तानिया अस्पताल, प्रसूताओं को जागना पड़ता है रात-रात भर,


भोपाल। सुल्तानिया अस्पताल में इन दिनों प्रसूताओं की नींद हराम है। बिल्लियों को खदेड़ते उनकी रात गुजर जाती है। माताओं को लगता है बिल्लियां उनके नौनिहालों को नोच न लें, इसलिए वे अच्छे से सो नहीं पा रही हैं। प्रसूति वार्ड में पांच बिल्लियां घूम रही हैं। गार्ड उन्हें बाहर खदेड़ देते हैं। कुछ देर में वे फिर आ जाती है। अस्पताल प्रबंधन ने कुत्ते व बिल्लियों को पकड़ने के लिए मप्र पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉरपोरेशन को पत्र लिखा है।सूत्रों ने बताया कि बताया कि तीन महीने पहले दो बिल्लियां थी। अब उनके बच्चे मिलकर पांच हो गई हैं। प्रसूताओं को लगता है कि बिल्लियां उनके बच्चे का अम्लाइकल कार्ड (नाभि में लगा नाड़ा) न नोच लें, इसलिए वे अच्छी से सो भी नहीं पा रही हैं। दिन में तो गार्ड भी बिल्लियों को खदेड़ते रहते हैं, लेकिन रात की शिफ्ट में गार्ड कम रहते हैं, इसलिए खतरा बढ़ जाता है। करीब दो महीने पहले मेट्रन ने अस्पताल अधीक्षक को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी थी व खतरे की आशंका जताई थी।नए अधीक्षक डॉ. अजय शर्मा की जानकारी में यह समस्या आई। उन्होंने मप्र पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉरपोरेशन को पत्र लिखकर बिल्ली और चूहे पकड़ने के इंतजाम करने को कहा है। सूत्रों ने बताया कि आबिदा वार्ड, प्रसूति वार्ड में बिल्लियां घूमती रहती हैं। कभी-कभी ये गायनी वार्ड तक पहुंच जाती हैं, लेकिन यहां बच्चे नहीं रहते, इसलिए उतना खतरा नहीं रहता। दरअसल, मरीजों के परिजन बचा हुआ खाना परिसर में या फिर अस्पताल के भीतर बाथरूम के आसपास रख देते हैं। इस वजह से कुत्ते-बिल्ली आते हैं।
हो चुकी हैं कई घटनाएं
– तीन साल पहले परिसर में कुत्तों के झुंड ने एक बच्चे को नोच डाला था।
– परिसर में कुत्ते मरीजों के जूते-चप्पल लेकर भाग जाते हैं। हर दूसरे-तीसरे दिन ऐसी घटनाएं होती हैं।
कॉरपोरेशन को पत्र लिखा है
बिल्लियों को खदेड़ने के लिए गार्डों को कहा गया है, जिससे कुत्ते-बिल्ली अंदर नहीं जा पाते। मप्र मेडिकल सप्लाई कॉरपोशन को भी इस संबंध में पत्र लिखा है – डॉ. अजय शर्मा अधीक्षक, सुल्तानिया अस्पताल
जेपी अस्पताल की मार्डन मैटरनिटी विंग भी घूमते हैं कुत्ते
राजधानी के जेपी अस्पताल में भी कुत्तों का जमावड़ा है। यहां मार्डन मैटरनिटी विंग में भी कुत्तों को झुंड घूमते हुए दिख जाता है। इससे अस्पताल में गंदगी तो होती ही है बच्चों को संक्रमण व काटने का डर भी रहता है।
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