जनता करे तो जुर्म खुद करे तो रास लीला
मामला देहात थाना परिसर में हुई आरक्षक राजेन्द्र सिंह की मौत का
केदार सिंह गोलिया ।। विगत 14 मार्च को देहात थाना परिसर में हुए होली के हुड़दंग में पुलिसकर्मियों द्वारा जमकर शराब पी गई और तेज आवाज में डीजे बजाकर डांस किया गया। ये पुलिसकर्मी शराब के नशे में इतने टुन्न थे कि नशे में हर्ष फायर कर बैठे और एक खामियाजा एक आरक्षक राजेन्द्र जाटव को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ा और अभी तक न ही देहात थाना टीआई और न किसी पुलिस वाले कोई कार्यवाही हुई है। यदि यही किसी अन्य विवाह उत्सव या किसी अन्य उत्सव में यह घटना घटित हो जाती तो पुलिस उसे राई का पहाड़ बना देती। इसलिए यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि यदि हर्ष फायर जनता करे तो जुर्म खुद करे तो रासलीला। अब बड़ा सवाल यह है कि खड़ा होता है कि किसी भी कार्यक्रम में क्या पुलिस को अपनी सर्विस रिवाल्वर से हर्ष फायर करने की छूट वरिष्ठ अधिकारियों की मौन स्वीकृति के रूप में दे रखी है। देहात टीआई या अन्य किसी जिम्मेदार पर कार्यवाही न होना अपने आप में सवालिया निशान लगाता है। पुलिस थाने के अंदर पुलिस की मामूली अनदेखी के कारण एक पुलिस आरक्षक को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
बॉक्स
दो पुलिस अधीक्षकों की कार्यवाही में दिखाई दिया अंतर
ठीक इसी प्रकार ग्वालियर की पुरानी छावनी में चल रही शराब पार्टी का वीडियो वायरल होने पर ग्वालियर पुलिस अधीक्षक ने दो सहायक उप निरीक्षक सहित 15 पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया। सवाल यह उठता है कि भले ही राजेन्द्र की मौत पुलिस के अनुसार एक हादसा हो, लेकिन उन्हें देहात थाना परिसर में इस तरह की पार्टी करने की अनुमति किसने दी थी और यदि ये सब बिना अनुमति के चल रहा था तो फिर देहात थाना प्रभारी कहां थे? जो भी पर एक बात तो साफ है कि पुलिस अधीक्षक शिवपुरी ने इस मामले की गंभीरता से कुछ तो समझौता अवश्य किया है जिनके कारण वह जनता के सवालों के घेरे में हैं।
बॉक्स
कार्यवाही की जद में क्यों नहीं देहात थाना प्रभारी?
पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार पांडे का इस मामले में कहना है कि यह एक महज दुर्घटना है और इस पर किसी भी प्रकार की शंका करना गलत है, लेकिन भले ही प्रधान आरक्षक की मौत एक दुर्घटना में हुई हो, पर कहीं न कहीं मौत का जिम्मेदार वहां चल रही शराबखोरी को तो माना ही जा सकता है। क्योंकि यदि ये सभी शराब के नशे में टुन्न होकर होली का हुड़दंग न कर रहे होते तो शायद यह घटना नहीं घटती। सवाल यह भी उठता है कि आखिर यह सब देहात परिसर के भीतर कैसे चल रहा था? क्या देहात थाना प्रभारी जो उसी कैम्पस में ही निवास करते हैं उन्हें इस तरह की पार्टी की भनक नहीं थी और यदि भनक थी तो उन्होंने यह सब कैसे होने दिया। जो भी लेकिन इतने गंभीर घटनाक्रम में किसी के खिलाफ भी कार्यवाही न किया जाना जिले में पदस्थ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान तो खड़े करता ही है।
बॉक्स
दिनभर चलता रहा वायरल वीडियो का दौर
इस घटनाक्रम से संबंधित वीडियो आज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जो दिनभर चर्चाओं का विषय बना रहा। घटना से संबंधित अलग-अलग वीडियो वाट्सएप पर पोस्ट होते रहे जिन्हें लेकर लोगों में काफी उत्सुकता देखी गई। पहले लोगों द्वारा कयास लगाए जा रहे थे कि आरक्षक की मौत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा चलाई गई गोली से हुई है, लेकिन वीडियो को देखने के बाद यह स्पष्ट प्रतीत हो रहा था कि आरक्षक राजेन्द्र सिंह की मौत उसकी ही रिवाल्वर से चली गोली से हुई है।






Be First to Comment