शिवपुरी। मप्र की भाजपा सरकार ने हमेशा से विपक्षी पार्टी के जनप्रतिनिधियों का अपमान ही किया है हद तो तब हो गई जब मप्र भूमि सुधार राज्य आयोग की बैठक में बकायदा निमंत्रण स्वरूप में लेटर भेजकर आमंत्रित किया और फिर अचानक ही देर रात्रि को प्लान बदलकर उस बैठक को स्थगित कर दिया, अब यदि प्रदेश की भाजपा सरकार की इस भर्राशाही नौकरशाही को न्यौता देकर खाना ही नहीं खिलाना है तो फिर आमंत्रण ही क्यों दिया जाता है, यह बर्दाश्त योग्य नहीं है वहीं दूसरी ओर बैठक तो होती है लेकिन जिन जनप्रतिनिधियों को उनके क्षेत्र की जानकारी है उन्हें ही नहीं बुलाया जा रहा तो फिर कैसे 1959 के कानून में सुधार होगा, इसे आसानी से समझा जा सकता है। उक्त विरोध जताया जनपद पंचायत शिवपुरी के अध्यक्ष पारम सिंह रावत ने जिन्होंने मप्र भूमि राज्य सुधार आयोग द्वारा होटल पीएस में आयोजित बैठक में बुलाकर अचानक स्थगित करना एक जनप्रतिनिधि का अपमान बताया और इस तरह की घोर भर्राशाही के प्रति अपना विरोध प्रकट किया। जनप्रतिनिधि पारम सिंह रावत ने खेद प्रकट किया कि जिस प्रदेश की भाजपा सरकार के नौकरशाह मप्र भूमि राज्य आयोग के सन् 1959 के कानून में सुझाव और विचार लेना चाहते तो इसमें स्थानीय जनपद, जिला पंचायत और नगर के प्रतिनिधियों को तो शामिल करना चाहिए ताकि वह धरातल पर अपने अनुभवों को बांट सके। लेकिन यहां पीएस होटल में मुख्य सचिव बीपी सिंह ने बैठक तो जरूर ली लेकिन इस बैठक में जनप्रतिनिधियों को बुलाकर बैठक ना करना और कानून में इस तरह कैसे होगा सुधार, इसे आसानी से समझा जा सकता है। जनपद अध्यक्ष पारम सिंह रावत ने जिला प्रशासन को भी सख्त लहजे में कहा है कि यदि आगे इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति होती है तो वह अपना विरोध दर्ज कराकर ऐसे आयोजनों से ना केवल दूरी बनाकर किनारा कर लेंगें बल्कि अन्य लोगों को जागरूक कर मप्र शासन के इन नौकरशाहों की असली करतूत भी बताई जाएगी कि किस प्रकार से यह जनप्रतिनिधियों का अपमान कर अपने हितों को साधने में जुटे रहते है।






Be First to Comment