खनियाधाना | खनियाधाना नगर के पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बडा मन्दिर चल रहे चतुर्मास गणाचार्य मुनि श्री १०८ विराग सागर महाराज जी के शिष्य ओजस्वी वक्ता श्रमण मुनि श्री विशोक सागर जी महाराज एंव श्रमण मुनि श्री विघेय सागर जी महाराज का बर्षा योग चल रहा है। मुनि श्री के सानिध्य मे पतंजलि योग पीठ हरिद्वार के मार्ग र्दशन मे पतंजलि योग समिति जिला प्रभारी निरन सिंह एवं खनियाधाना तहसील प्रभारी वहाद्दुर सिंह लोधी आदि समस्त कार्यकर्ता उपस्थित रहेगे । योग शिक्षक द्वारा लोगों को योग के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रहा है। जिला प्रभारी निरन जी ने कहा कि “भक्ति का सर्वोत्तम मार्ग अष्टांग योग है, जिसमें यम, नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार,धारणा,ध्यान व समाधि मुख्य अनुष्ठान हैं!” योग का सरल अर्थ है –“जोड़ना ” , अर्थात योग वह क्रिया या व्यवहार है. जो हमें जोड़ता है ! लौकिक व्यवहार में पिता पुत्र , पति-पत्नी,भाई- भाई, मित्र -मित्र, परस्पर देश वासी मिल कर , जुड़कर रहें – यह भी योग है । सत्य,क्षमा,अहिंसा,दया,सेवा,परोपकार,आदि से जुड़ना मानसिक योग है ,और आत्मा का परमात्मा से जुड़ना परम योग है। और इस सब के लिए स्वस्थ रहना जरूरी है जो नित्य योगासन, प्राणायाम,व्यायाम से ही सम्भव है ! योग शिक्षक जिला प्रभारी निरन जी ने आज चक्रासन,हलासन,शशकासन,मण्डूकासन,पवनमुक्त्त आसन कराते हुए कपाल भांति व भ्रामरी प्राणायाम को अनेक रोगों की औषधि बताया ! इस मौके पर मनोज चौधरी.सनत देदामूरी.जयप्रकाश चौधरी.अजित जैन.विरेन्द्र जैन . पिन्टू जैन. ईशू जैन.अरिहंत जैन.अभिषेक जैन.पंकज बामोर.प्रयुल जैन .आदि उपस्थित रहे






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