भोपाल। प्रदेश में सड़क और मेट्रो रेल परियोजना के काम को गति देने के लिए सरकार पेट्रोल और डीजल पर सेस लगाएगी। यह भाव पर एक फीसदी (लगभग पचास पैसे प्रति लीटर) होगा। इसके लिए अध्यादेश लाया जाएगा। सरकार को सेस से करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए की आय होने की उम्मीद है।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट में अध्यादेश लाने को मंजूरी दी गई। वहीं, सहरिया जनजाति के युवाओं को बिना परीक्षा दिए नौकरी मिल जाएगी। इसके लिए मप्र लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, जनजातियां और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) नियम में संशोधन की इजाजत कैबिनेट ने दी।सरकार ने सड़क और मेट्रो रेल परियोजना के कामों को गति देने के लिए सेस लगाने का फैसला किया है। इसके लिए मप्र हाई स्पीड डीजल उपकर और मप्र मोटर स्प्रिट उपकर अध्यादेश लाया जाएगा। यह कीमत पर एक फीसदी होगा।एक अन्य फैसले में सहरिया जनजाति को मप्र लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, जनजातियां और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) नियम 1998 के दायरे में लाया गया है। इससे इन्हें बिना परीक्षा दिए संविदा शाला शिक्षक, वनरक्षक से लेकर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर न्यूनतम अहर्ता पूरी करने पर नियुक्ति मिल जाएगी।विशेष पिछड़ी जनजाति होने के कारण बैगा और भारिया को इसका लाभ मिल रहा है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने पिछले माह शिवपुरी में सहरियाओं के लिए कई घोषणाएं की थीं, उसमें यह भी शामिल थी। सरकार के इस फैसले को कोलारस और मुंगावली विधानसभा के उपचुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
यह है सेस का गणित
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार को पिछले साल (2016-17) पेट्रोल, डीजल और एयर ट्रेफिक फ्यूल पर कर से आठ हजार 903 करोड़ रुपए मिले थे। इस वर्ष अभी तक इन तीनों से छह हजार 562 करोड़ रुपए की आय हो चुकी है। वेट में कमी करने से करीब दो हजार करोड़ रुपए का राजस्व घटने का अनुमान है। इसे देखते हुए एक फीसदी सेस लगाया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि डीजल से करीब 300 और पेट्रोल से 60 से 70 करोड़ रुपए तक राजस्व मिल सकता है।






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