भोपाल। राजधानी के सुभाषनगरविश्राम घाट पर एक बूढ़ी मां ने अपने 32 साल के जवान बेटे को मुखाग्नि दी।
दृश्य इतना हृदय विदारक था कि वहां मौजूद हर कोई रो पड़ा। मां ने अपने बेटे
का विधिवत अंतिम संस्कार किया, यहां तक कि कपाल क्रिया भी की। बता दें कि
हिंदू समुदाय में महिलाओं को विश्रामघाट में प्रवेश तक वर्जित कहा गया है
परंतु क्या करते। तमाम इंतजार के बावजूद एक भी रिश्तेदार नहीं आया। सारी
क्रिया मां ने ही सम्पन्न कीं। ताकि बेटे को मोक्ष प्राप्त हो सके।
72, जूनियर एमआईजी, सुभाष नगर में रहने वाले 32 वर्षीय राजेश सिंह को इस
साल 25 जून को पैरालिटिक अटैक आया था। इसके बाद उन्हें रेडक्रॉस हॉस्पिटल
में भर्ती कराया गया था। यहां पर इनकी ब्रेन सर्जरी हुई, जिसके बाद राजेश
की हालत बिगड़ती चली गई। इस बीच वे कोमा में चले गए थे। परिवार और दोस्तों
के तमाम प्रयास भी राजेश को बचा नहीं सके। शनिवार रात 1.30 बजे डॉक्टरों ने
उन्हें मृत घोषित कर दिया।
साल 25 जून को पैरालिटिक अटैक आया था। इसके बाद उन्हें रेडक्रॉस हॉस्पिटल
में भर्ती कराया गया था। यहां पर इनकी ब्रेन सर्जरी हुई, जिसके बाद राजेश
की हालत बिगड़ती चली गई। इस बीच वे कोमा में चले गए थे। परिवार और दोस्तों
के तमाम प्रयास भी राजेश को बचा नहीं सके। शनिवार रात 1.30 बजे डॉक्टरों ने
उन्हें मृत घोषित कर दिया।
वीवीएम कॉलेज ऑफ नर्सिंग में कार्यरत राजेश यहां अपनी मां के साथ रहते थे।
करीब पांच वर्ष पहले पिता का निधन हो चुका था। एक बहन थी, जिसकी शादी हो
चुकी है। राजेश की मौत के बाद रीवा में रहने वाले रिश्तेदारों को सूचना दी
गई लेकिन रविवार शाम तक कोई भी भोपाल नहीं आया। काफी देर इंतजार करने के
बाद मां बिंदु देवी ने ही बेटे को मुखाग्नि देने का फैसला किया। चिता के
साथ श्मशान तक पहुंची मां ने विधि-विधान से मुखाग्नि देने के बाद कपाल
क्रिया भी की।
करीब पांच वर्ष पहले पिता का निधन हो चुका था। एक बहन थी, जिसकी शादी हो
चुकी है। राजेश की मौत के बाद रीवा में रहने वाले रिश्तेदारों को सूचना दी
गई लेकिन रविवार शाम तक कोई भी भोपाल नहीं आया। काफी देर इंतजार करने के
बाद मां बिंदु देवी ने ही बेटे को मुखाग्नि देने का फैसला किया। चिता के
साथ श्मशान तक पहुंची मां ने विधि-विधान से मुखाग्नि देने के बाद कपाल
क्रिया भी की।






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