जबलपुर। निशुल्क साइकिल वितरण योजना में होने वाली गड़बड़ी को रोकने शिक्षा विभाग ने निर्णय लिया कि इस बार ‘गूगल एप’ की मदद से स्कूल से घरों की दूरी नापी जाएगी। स्कूल से 2 किमी दूर रहने वाले छात्रों को ही साइकिल दी जाएंगी, लेकिन 5 माह बाद भी शिक्षा विभाग बसाहट से स्कूल की दूरी नहीं नाप पाया। परीक्षाएं कराने का समय आ गया है, लेकिन अभी तक स्कूलों तक साइकिलें पहुंच नहीं पाईं। स्कूल से दो से तीन किमी दूर रहने वाले 6वीं और 9वीं के छात्र बिना साइकिल ही स्कूल तक का सफर कर रहे हैं। इसके पहले अगस्त तक साइकिलों का वितरण हो जाता था।
कर रहे वेरीफिकेशन
– गांव, क्षेत्र की बसाहट से पास की मिडिल, हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों की जीआईएस (ग्लोबल इन्फॉरमेंशन सिस्टम) मैपिंग कराकर उसे जीआईएस पोर्टल में अपलोड करवाया गया है। ताकि पहले से जनरेट की गई छात्रों की समग्र आईडी ट्रेस कर बसाहट से स्कूल की दूरी का पता लगाई जा सके।ये दावा किया जा रहा है कि ब्लॉक स्तर पर जनशिक्षक, बीएससी व शिक्षकों ने जीएसआई ट्रैकर चालू कर मोबाइल से इन्फ्रा मैपिंग गूगल एप से करीब 1800 बहासटों की सेंटर लोकेशन मैप्ड कर ली है। बसाहटों का डाटा गूगल एप में आने के बाद बसाहट वाले क्षेत्र की पास की मिडिल, हाई, हायर सेकंडरी स्कूलों का डाटा फीड कर भोपाल भिजवा दिया गया है। अब ब्लॉक स्तर पर जीआईएस मैपिंग से अपलोड दूरी को गूगल ड्राइव से सत्यापित कराया जा रहा है।
नहीं चलेगा घुमावदार रास्ता
अभी तक 3 किमी दूर रहने वाले छात्रों को भी साइकिलें दे दी जाती थी। शिक्षक, प्राचार्य घुमावदार रास्ता दिखाकर अपात्रों को भी साइकिलें दिला देते थे, लेकिन नई व्यस्था के तहत अब बसाहट से स्कूल की दूरी 2 किमी होने पर ही छात्रों को साइकिलें मिल पाएंगी। उसमें भी घुमावदार रास्ता नहीं चलेगा, क्योंकि गूगल एप के जरिए लेटीट्यूट-लॉगीट्यूट की दूरी से बसाहटों की मेपिंग की गई है।मैपिंग का काम पूरा कर लिया गया है। सॉफ्टवेयर से अब पात्र छात्रों का वेरीफिकेशन कराया जा रहा है। शासन से जब साइकिलें आएंगी वितरित करा दी जाएंगी।
डा़ॅ आरपी चतुर्वेदी, डीपीसी




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