लिए चालकों द्वारा किस तरह नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह किसी
से छिपा नहीं है। इसके बाद भी प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही
है। भले ही टैक्सियों को आरटीओ द्वारा 3 सवारियां और मैजिक को 4 सवारियां
बैठने की अनुमति प्रदान की जाती है। लेकिन टेक्सी और मैजिक चालकों के
द्वारा नियम को ताक पर रखकर 3 से 4 की जगह 15 से अधिक सवारियां (स्कूल
बच्चे) बैठाकर स्कूली बच्चों व यात्रियों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।
पुलिस और आरटीओ इस संबंध में कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। स्थिति यह है कि
ऑटो मैजिक इतने ओवरलोडिंग हो रहे हैं कि कभी भी अनियंत्रित होकर गंभीर
हादसा होने की आशंका बढ़ रही है। इसके बाद भी न तो इस ओर स्कूल प्रबंधक
ध्यान दे रह हैं और न ही संबंधित विभाग इन वाहन चालकों पर कोई ठोस कार्रवाई
कर रहा है। ऐसे में ऑटो, मैजिक चालकों के द्वारा चंद रुपयों के लालच में
बच्चों की जिंदगी से खेला जा रहा है। इस और प्रशासन को जल्द ही ध्यान देना
चाहिए।
बदरवास में क्षमता से अधिक सवारियों को ढो रहे वाहन, नहीं होती कार्रवाई।
सख्त कार्रवाई करेंगे
कई
बार बदरवास में हमारी परिवहन विभाग की टीम गई है। लेकिन टीम को देखकर वाहन
छिप जाते है। फिर भी हम नियमों के विरुद्ध चलने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त
करवाई करेंगे। विक्रमजीत सिंह कंग,आरटीओ शिवपुरी
बिना परमिट संचालित हो रहे सवारी वाहनों से राजस्व का नुकसान
कस्बे के स्कूलों में बच्चों को आवागमन करने वाले टैक्सी वाहनों को
चालकों द्वारा बिना परमिट के ही संचालित की जा रहा है। ऐसे में सरकार को हर
महीनों हजारों रुपए का चुना तो लग ही रहा है। बल्कि कभी कोई हादसा हो गया
तो इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई भी नहीं हो पाएगी। नगर में ही करीब दो
दर्जन से अधिक वाहन बिना परमिट के स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने का
काम कर रहे हैं। ऑटो व मैजिक चालकों द्वारा 3 से 4 सीट की क्षमता वाले ऑटो,
मैजिक में 14 से अधिक बच्चें व स्कूली बैंग और ग्रामीणों द्वारा सामान रख
लिया जाता हैं। तो ऑटो व मैजिकों में बच्चों व ग्रामीणों को कभी- कभी लटक
कर स्कूल व गांव जाना पड़ता है।
चंद पैसों के लालच में सवारियों की जान से खिलवाड़
ग्रामीणों की माने तो वर्तमान में टैक्सी, मैजिक वाले उनसे गांवों
से नगर तक के 20 से 30 रुपए किराया लेते हैं। लेकिन जब सवारियों को सुविधा
के लिए वाहन में भीड़ कम करने को कहते हैं तो वे डबल किराए की मांग करते
हैं। इसलिए भी सवारियों को ओवर लोडिंग का ज्यादा विरोध नहीं करते। वहीं
गांवों के लिए अन्य दूसरे वाहन नहीं चलने के कारण मजबूरी में भीड़ में जाना
आवश्यक हो जाता है। इसलिए उन्हें मजबूरी में जान में जोखिम डालकर सफर करना
पड़ता है।
गांवों को जाने वाले वाहनों पर पुलिस और परिवहन विभाग नहीं करता कार्रवाई
नगर में स्थित पुलिस थाना सहित गांवों को जाने वाले वाहनों को
प्रत्येक रोड पर थाना पड़ता है। इसके अलावा निजी स्कूल संचालकों को भी सब
कुछ पता होता है। कि स्कूल वाहनों पर क्षमता से अधिक बच्चों को बिठाया जाता
है। इन वाहनों की कभी भी पुलिस द्वारा चेकिंग नहीं की जाती है और न ही
शिक्षा विभाग या परिवहन विभाग ध्यान दे रहा है। यही वजह है कि स्कूली वाहन
संचालक मनमानी कर बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
यहां पर निजी वाहनों का नियम विरुद्ध संचालन किया जा रहा है
नगर में संचालित गांवों के लिए चलने वाले सवारी वाहनों में कुछ
ऐसा ही मंजर देखने को मिलता है, जहां पर मारुती वैन, टाटा मैजिक, आपे,
टेम्पो, टैक्सी सहित अन्य छोटे-छोटे वाहन ग्रामीणों व स्कूली बच्चों को
ठूस-ठुस कर भर कर खुलेआम नगर से स्कूलों व गांवों में जा रहे हैं। इनमें
अधिकांश निजी वाहन हैं। जो स्कूली बसों का काम कर रहे है। ये वाहन इतने
ओवरलोडिंग होकर पुलिस व शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने से ही गुजर
रहे हैं। लेकिन इनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं इन ओवरलोडिंग वाहन चालकों पर
की जा रही है।





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