अजयराज सक्सेना
शिवपुरी। शहर के गली-मोहल्लों में कई अवैध कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, कोई फर्राटेदार इंग्लिश सिखाने का दावा करता है, तो कोई आईएएस आईपीएस क्वालीफाई कराने का। हालत यह है कि इन संस्थाओं द्वारा कॉम्पटीशन क्लाीफाई कराने के दावे किए जाते हैं। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा की तैयारी व कॉम्पटीशन कराने वाले कोचिंग की शहर में भरमार है। यह कोचिंग संचालक मनमाने तरीके से छात्रों से फीस वसूल रहे हैं, लेकिन इन कोचिंग संचालकों के खिलाफ जिला प्रशासन अलर्ट नहीं है। शहर के रिहायशी क्षेत्रों में अधिकांश अवैध रूप से चल रहे कोचिंग सेंटर आम लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। न तो इनका पंजीयन है और न ही इन्हें खोलने के लिए कोई स्थान सुनिश्चित किया गया है। यह कोचिंग संचालक अभिभावकों से मनमानी फीस वसूलते हैं। जबकि इन्होंने कोचिंग सेंटर संचालित करने के लिए संस्थान का पंजीयन तक नहीं कराया है। कोचिंग सेंटर पर वाहन खड़े के लिए पार्किंग व्यवस्था भी नहीं है। खास बात यह है कि कोई भी शासकीय शिक्षक बच्चों को ट्यूशन नहीं पढ़ा सकता, लेकिन शहर के अधिकांश शासकीय शिक्षक अपने घरों पर बेधड़क ट्यूशन पढ़ा रहे हैं।
एक सैंकड़ा से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित
एक अनुमान के मुताबिक शहर में एक सैंकड़ा से भी अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। बताया जाता है कि शहर में केवल गिने चुने ही सेंटर वैध संचालित हैं। बाकी के पास रजिस्ट्रेशन तक भी नहीं है। नियमानुसार रिहायशी क्षेत्र में पार्किंग एवं पर्याप्त जगह की व्यवस्था के बगैर संचालक कोचिंग सेंटर नहीं चला सकते, लेकिन कार्रवाई नहीं होने के कारण कोचिंग सेंटर के संचालक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। कोचिंग सेंटरों पर आने वाले छात्र मुख्य सड़क पर अपने वाहन खड़े कर देते हैं, इससे स्थानीय लोगों के अलावा राहगीरों को सड़क पर चलने में परेशानी हो रही है।
नहीं हैं मूलभूत सुविधाएं
कोचिंग सेंटर संचालकों द्वारा फीस तो मनमुताबिक ली जाती है, लेकिन इन सेंटरों में छात्र-छात्राओं द्वारा सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नसीब नहीं होता है। इन सेंटरों में न तो छात्राओं और न ही छात्रों के लिए टॉयलेट की कोई सुविधा होती है और न ही गल्र्स के लिए चैनजिंग जैसी कोई सुविधा। इसके अलावा पानी तक भी सुविधा नहीं मिलती है।
सड़कों पर लगते हैं जाम
अधिकतर कोचिंग सेंटर शहर की मुख्य सड़कों पर संचालित किए जा रहे हैं जिन पर पार्किंग की व्यवस्था न होने के चलते सड़कों पर जाम जैसे हालात निर्मित होते हैं जिससे आम नागरिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा कोचिंग राजेश्वरी रोड पर संचालित हो रही हैं यहां ही सबसे ज्यादा जाम के हालात बनते हैं।
रुपए देने के बाद भी बैठना पड़ता है जमीन
हाल ही में पटवारी के लिए आवेदन भरे गए हैं जिसे लेकर कोचिंग सेंटरों पर काफी भीड़ है। कई कोचिंगों पर पूरे कोर्स कराने के ठेके लिए गए हैं इसके बदले में छात्रों से मनमाने रुपए ऐंठे गए हैं। आगामी वेकेन्सी को देखते हुए कोचिंग सेंटरों पर छात्र-छात्राओं की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है इसलिए कोचिंग संचालकों द्वारा अपनी फीस में भी इजाफा किया है और मनमानी फीस वसूल रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी अधिकतर कोचिंग सेंटरों पर छात्र-छात्राओं को जमीन पर बैठना पड़ता है।
टैक्स और जीएसटी की चोरी
कोचिंग सेंटरों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू है, लेकिन कोचिंग सेंटरों द्वारा छात्र-छात्राओं को फीस की पक्की रसीद नहीं दी जाती है। इसके अलावा इनके द्वारा लाखों रुपए के टैक्स की भी चोरी की जा रही है।
क्या कहते हैं छात्राएं
-हमारी कोचिंग में टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है और न ही पानी की जबकि इनकी आवश्यकता सभी को होती है।
सुमन, छात्रा
-कोचिंग के बाहर पार्किंग की सुविधा नहीं है इसके अलावा न तो टॉयलेट है और न ही पानी की कोई सुविधा नहीं है। जबकि सर के द्वारा फीस में एक रुपया भी कम नहीं किया जाता है।
नैना शर्मा, छात्रा
इनका कहना है
बच्चों को संस्थान द्वारा मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है और यह बच्चों का मानव अधिकार भी है। यदि हमारे संज्ञान में इस प्रकार की कोई बात लाई जाती है तो हम उसे आवश्यक कार्यवाही हेतु माननीय अध्यक्ष महोदय और आयोग की ओर भेजेंगे।
आलोक एम. इंदौरिया
जिला संयोजक मप्र मानव अधिकार आयोग भोपाल






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