शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर के तृतीय दिवस हुए प्रवचन
(शिवकांत सोनी) खनियाधाना। ज्ञान तो हर जीव को होता है लेकिन जो ज्ञान अपने ज्ञायक की प्रसिद्धि करे वास्तव में वही सच्चा ज्ञान माना जाता है अत: इस शिविर के माध्यम से यदि हम अपने ज्ञान को जाग्रत कर अभेद आत्मा में समा जाएं तो यही सच्चा ज्ञानानंद महोत्सव होगा। उक्त पंक्तिया आज खनियाधाना में चल रहे 51वें श्री वीतराग विज्ञान शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर के तृतीय दिन प्रवचन करते हुए बाल ब्र. सुमत प्रकाश जी ने कहीं। ग्रंथादिराज समयसार जी परमागम में बर्णित आत्मा की सैंतालीस शक्तियों पर प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि इन्द्रिय ज्ञान को ज्ञान मानोगे तो चोर कहलाओगे क्योंकि लक्षण सच्चा नहीं हुआ तो लक्ष्य प्राप्त नहीं होगा । जैसे दर्पण में काले रंग का संयोग होने पर वह काला दिखता है लेकिन वह काला नहीं होता, वह स्वच्छ ही रहता है उसी प्रकार आत्मा में राग दिखाई देता है लेकिन आत्मा कभी राग रूप नहीं होता है । ज्ञान राग को जानता है यह ज्ञान की ही स्वच्छता है, ज्ञान को विकार रूप अनुभव करना ये उसका तिरस्कार करना है एवं ज्ञान को ज्ञान रूप अनुभव करना ये उसकी महिमा है। ज्ञान की माहिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञान को खींच कर स्वच्छ मत करना चाहो वह तो स्वच्छ ही है ऐसा स्वीकार करना ही ज्ञानानंद है । जो जीव ज्ञेयों में आनंद मानता है उसे ज्ञायक में आनंद नहीं आता मुझे मेरा ज्ञान मिल गया इसका नाम ज्ञानानंद महोत्सव है।
प्रतिदिन संस्कारित हो रहे सैकड़ो बच्चे
शिविर आयोजन समिति के संयोजक संतोष बैध, सुनील सरल, महावीर कठरया एवं दीपक व्या, सोमिल मोदी ने बताया कि प्रतिदिन बालक, युवा, एवं प्रौढ़ सभी आयु वर्ग की अलग अलग कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है जिसमे करीब एक हजार लोग बाहर से पधार कर शिविरार्थी बनकर लाभ ले रहे हैं । बच्चों को उनकी सरल शैली में खेल-खेल में धार्मिक अध्ययन कराने के लिए विशेष रूप से डाँ. शुद्धात्मप्रभा जी टडैया पधारीं है जो प्रतिदिन सैकड़ो बच्चों को संस्कारित कर रही हैं । इसके अलावा प्रतिदिन देश विदेश में ख्याति प्राप्त विद्वान डाँ. हुकम चंद जी भारिल्ल, पं. अभय कुमार जी शास्त्री देवलाली, पं. राकेश जी शास्त्री नागपुर, डॉ संजीव जी गोधा जयपुर, पं. कमल चंद जी पिड़ावा, पं. कैलाश चंद जी अचल ललितपुर, डाँ. प्रवीण जी शास्त्री बांसवाड़ा आदि अनेक विद्वानों के प्रवचन, कक्षाओं का लाभ सभी को मिल रहा है।
(शिवकांत सोनी) खनियाधाना। ज्ञान तो हर जीव को होता है लेकिन जो ज्ञान अपने ज्ञायक की प्रसिद्धि करे वास्तव में वही सच्चा ज्ञान माना जाता है अत: इस शिविर के माध्यम से यदि हम अपने ज्ञान को जाग्रत कर अभेद आत्मा में समा जाएं तो यही सच्चा ज्ञानानंद महोत्सव होगा। उक्त पंक्तिया आज खनियाधाना में चल रहे 51वें श्री वीतराग विज्ञान शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर के तृतीय दिन प्रवचन करते हुए बाल ब्र. सुमत प्रकाश जी ने कहीं। ग्रंथादिराज समयसार जी परमागम में बर्णित आत्मा की सैंतालीस शक्तियों पर प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि इन्द्रिय ज्ञान को ज्ञान मानोगे तो चोर कहलाओगे क्योंकि लक्षण सच्चा नहीं हुआ तो लक्ष्य प्राप्त नहीं होगा । जैसे दर्पण में काले रंग का संयोग होने पर वह काला दिखता है लेकिन वह काला नहीं होता, वह स्वच्छ ही रहता है उसी प्रकार आत्मा में राग दिखाई देता है लेकिन आत्मा कभी राग रूप नहीं होता है । ज्ञान राग को जानता है यह ज्ञान की ही स्वच्छता है, ज्ञान को विकार रूप अनुभव करना ये उसका तिरस्कार करना है एवं ज्ञान को ज्ञान रूप अनुभव करना ये उसकी महिमा है। ज्ञान की माहिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञान को खींच कर स्वच्छ मत करना चाहो वह तो स्वच्छ ही है ऐसा स्वीकार करना ही ज्ञानानंद है । जो जीव ज्ञेयों में आनंद मानता है उसे ज्ञायक में आनंद नहीं आता मुझे मेरा ज्ञान मिल गया इसका नाम ज्ञानानंद महोत्सव है।प्रतिदिन संस्कारित हो रहे सैकड़ो बच्चे
शिविर आयोजन समिति के संयोजक संतोष बैध, सुनील सरल, महावीर कठरया एवं दीपक व्या, सोमिल मोदी ने बताया कि प्रतिदिन बालक, युवा, एवं प्रौढ़ सभी आयु वर्ग की अलग अलग कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है जिसमे करीब एक हजार लोग बाहर से पधार कर शिविरार्थी बनकर लाभ ले रहे हैं । बच्चों को उनकी सरल शैली में खेल-खेल में धार्मिक अध्ययन कराने के लिए विशेष रूप से डाँ. शुद्धात्मप्रभा जी टडैया पधारीं है जो प्रतिदिन सैकड़ो बच्चों को संस्कारित कर रही हैं । इसके अलावा प्रतिदिन देश विदेश में ख्याति प्राप्त विद्वान डाँ. हुकम चंद जी भारिल्ल, पं. अभय कुमार जी शास्त्री देवलाली, पं. राकेश जी शास्त्री नागपुर, डॉ संजीव जी गोधा जयपुर, पं. कमल चंद जी पिड़ावा, पं. कैलाश चंद जी अचल ललितपुर, डाँ. प्रवीण जी शास्त्री बांसवाड़ा आदि अनेक विद्वानों के प्रवचन, कक्षाओं का लाभ सभी को मिल रहा है।






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