कोर्ट ने 20 साल की सजा सुनाई है। गुरमीत के अलावा भी कई ऐसे संत हैं जो
विवादों में रहे हैं। निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह नरूला भी इनमें से
एक हैं। निर्मल बाबा पर धर्म और आस्था के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपए की
धोखाधड़ी का आरोप लग चुका है। बता दें कि करोड़ों रुपए के मालिक निर्मल
बाबा ने ईंट भट्ठे से लेकर कई बिजनेस में किस्मत आजमा चुके हैं। झारखंड
विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष नामधारी सिंह इनके रिश्तेदार बताए जाते हैं।
इन बिजनेस में हाथ आजमा चुके हैं निर्मल बाबा…
– निर्मल बाबा अपनी लाइफ में कई बिजनेस कर चुके हैं। लेकिन किसी में सफलता
नहीं मिली। उन्होंने झारखंड में रहते हुए पहले कपड़े की दुकान खोली।
– इसके बाद ईंट के भट्टे का धंधा शुरू किया जो बुरी तरह से असफल रहा।
उन्होंने खदानों की नीलामी में ठेकेदारी की, किन्तु वहां भी असफल ही रहे।
– इसी समय उन्होंने अपनी छठी इंद्री खुलने का एलान किया और लोगों की समस्या दूर करने के लिए मजमा लगाने लगे।
– 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों के कारण
निर्मल बाबा रांची वाला अपना घर बेचकर दिल्ली चले आये और फिर यहीं से अपने
को निर्मल बाबा के रूप में प्रचारित कर ‘निर्मल दरबार’ लगाना शुरू कर दिए.
– उन्होंने कृपा बरसाने के नाम पर लोंगो को मूर्ख बनाते हुए अपनी खून पसीने
की कमाई का 10 प्रतिशत ‘दसबंध’ के नाम पर हर महीने देने को कहा। बाबा के
पास आज अरबों की संपत्ती है। दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश में स्थित
बंगले में रहते हैं।
विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष नामधारी सिंह रिश्तेदार हैं…
– निर्मल बाबा के पिता का निधन होने के बाद उनकी मदद करने के लिए उनके
रिश्तेदार इंदर सिंह नामधारी अपने साथ झारखंड ले आए थे। बिजनेस में असफलता
के बाद निर्मल बाबा दरबार लगाने लगे।
– निर्मल बाबा समागम” में शामिल होने की फ़ीस 3870 थी। “निर्मल बाबा शो” में
शामिल होने की एक व्यक्ति को 6450 की फीस देनी होती थी। उन्होंने अपनी एक
वेबसाइट भी बनाई थी।
– निर्मल बाबा लोगों की कई समस्याओं के समाधान का उपाय बताते थे। जैसे –
काले रंग का नया पर्स और उसमे नया नोट रखें, आपकी कृपा गोलगप्पे, चाट और
छोले के कारण रुकी हो तो खुद भी खाएं और कुछ गरीबों को भी खिला दें।
– किसी देवता या मंदिर के कारण रुकी हो तो वहां जाकर महंगी वाली माला के
साथ साथ पांच सौ का नोट भी चढ़ाएं। शराब पीते हैं तो जाकर काल भैरव को दो
बोतल चढ़ाइए और दो बोतल खुद पी जाइये, कल्याण हो जायेगा और कृपा बरसने
लगेगी। निर्मल बाबा कहते हैं कि उन्हें ईश्वरीय शक्ति हासिल है और उनका
तीसरा नेत्र खुला हुआ है।
– निर्मल बाबा के पिता का निधन होने के बाद उनकी मदद करने के लिए उनके
रिश्तेदार इंदर सिंह नामधारी अपने साथ झारखंड ले आए थे। बिजनेस में असफलता
के बाद निर्मल बाबा दरबार लगाने लगे।
– निर्मल बाबा समागम” में शामिल होने की फ़ीस 3870 थी। “निर्मल बाबा शो” में
शामिल होने की एक व्यक्ति को 6450 की फीस देनी होती थी। उन्होंने अपनी एक
वेबसाइट भी बनाई थी।
– निर्मल बाबा लोगों की कई समस्याओं के समाधान का उपाय बताते थे। जैसे –
काले रंग का नया पर्स और उसमे नया नोट रखें, आपकी कृपा गोलगप्पे, चाट और
छोले के कारण रुकी हो तो खुद भी खाएं और कुछ गरीबों को भी खिला दें।
– किसी देवता या मंदिर के कारण रुकी हो तो वहां जाकर महंगी वाली माला के
साथ साथ पांच सौ का नोट भी चढ़ाएं। शराब पीते हैं तो जाकर काल भैरव को दो
बोतल चढ़ाइए और दो बोतल खुद पी जाइये, कल्याण हो जायेगा और कृपा बरसने
लगेगी। निर्मल बाबा कहते हैं कि उन्हें ईश्वरीय शक्ति हासिल है और उनका
तीसरा नेत्र खुला हुआ है।





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