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पत्नी का शव कंधे पर ले जाने वाले मांझी की बदली जिंदगी

dana manjhi 28 08 2017भुवनेश्वर। बीते वर्ष ओडिशा के कालाहांडी में रहने
वाले दाना मांझी की तस्वीरें दुनियाभर में चर्चा में बनी हुई थीं। मांझी
करीब 12 किमी की दूरी तक पत्नी का शव कंधे पर लेकर गए थे। उन्हें पैसे की
कमी के चलते और जिला अस्पताल के अधिकारियों द्वारा कथित रूप से मदद न देने
पर यह कदम उठाना पड़ा था।
अब एक साल बाद, मांझी की जिंदगी बदल गई है।
या यूं कहे कि उनकी जिंदगी में बदलाव का दौर शुरू हो गया है। एक साल पहले
हुए घटनाक्रम के बाद कई लोग मांझी की मदद के लिए आगे आए और उन्हें आर्थिक
सहायता दी थी। मांझी के पास अब 37 लाख रुपए से अधिक रुपए हैं। अब उनकी
तीनों बेटियां भुवनेश्वर के एक स्कूल में पढ़ने जाती हैं।
कुछ महीनों
पहले ही मांझी का तीसरा विवाह हुआ है और अब वह अपने परिवार के लिए बेहतर
सुविधाएं जुटाने के लिए आशान्वित हैं। 24 अगस्त 2016 को टीबी से पीड़ित
मांझी की पत्नी ने अंतिम सांस ली थी। अस्पताल से मदद न मिलने पर मांझी ने
पुरानी चादरों में पत्नी का शव लपेट दिया और उसे कंधे पर लेकर गांव के लिए
निकल गए।
साथ-साथ उनकी भावुक बेटी चल रही थी। 12 किमी की दूरी तय
करने पर जब कुछ स्थानीय पत्रकारों ने मांझी की दयनीय हालत को देखा, तो
उन्हें जिला प्रशासन को सूचना दी जिसके बाद एंबुलेंस बुलवाई गई। गांव पर
ध्यान दें सरकारमांझी का मानना है कि सरकार और संबंधित अधिकारियों को अब उन
पर ध्यान केंद्रित न कर उनके गांव के विकास को लेकर कदम उठाना चाहिए।
यह
मदद मिली थी-ओडिशा सरकार ने इंदिरा आवास योजना के तहत घर आवंटित किया
था।-बहरीन के प्रधानमंत्री प्रिंस खालिफा ने नौ लाख रुपए का चेक दिया
था।-सुलभ इंटरनेशनल ने 2021 तक तय राशि देने की घोषणा की थी।
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