जनता परेशान, इस्तीफा मंजूर नहीं होने के बाद भी प्रशासन ने नहीं की कोई ठोस कार्यवाही
मामला वार्ड क्रमांक 6 के पार्षद के इस्तीफे का
नीरज श्रीवास्तव
शिवपुरी। यदि जनप्रतिनिधि इस्तीफा देकर जनता को ललकारने वाले अंदाज में कहे कि मैने तो इस्तीफा दे दिया। अब मैं कोई काम नहीं करूंगा और उसका इस्तीफा शासन प्रशासन स्वीकार न करे। तो जनता क्या करे? उपरोक्त स्थिति में साफ तौर पर जनद्रोही दिखाई दे रहे जनप्रतिनिधि से ठगी और शासन प्रशासन से मायूस जनता क्या करे? यदि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और प्रशासन चेहरा देखकर प्रभावहीन हो जायें तो जनता क्या करे? यदि इस्तीफा देने वाला जनप्रतिनिधि सदन की कार्यवाहियों (बैठकें) में भाग न लेकर बिना कार्य वेतन प्राप्त करे! और शासन-प्रशासन हाथ पर हाथ धरकर बैठा रहे तो जनता क्या करे? उपरोक्त प्रश्न शिवपुरी जिला मुख्यालय पर स्थित वार्ड क्रमांक 6 के भाजपा पार्षद मनीष गर्ग मंजू के मामले में प्रासंगिक है। जी हां! वार्डवासियों की मानें तो भाजपा से चुने गए पार्षद मंजू ने निर्वाचित होने के एक साल बाद ही यह मौखिक घोषणा करना शुरू कर दिया कि मैने पार्षदी से इस्तीफा दे दिया है मुझसे वार्ड की जनता किसी काम के लिए संपर्क न करें। जब वार्डवासी परेशान हुए तो उन्होंने हल्ला और हंगामा मचाना शुरू कर दिया। जिस पर मंजू ने लिखित तौर पर अपना इस्तीफा तत्कालीन कलेक्टर के बगले पर जाकर दे दिया और अपने घर के बाहर एक कागज पर लिख दिया कि मैने (मनीष गर्ग मंजू) पार्षद पद से इस्तीफा दे दिया है। मुझ से किसी कार्य के लिए संपर्क न किया जाए। ग्रीष्मकाल मेंं पेयजल संकट से जूझ रही जनता जब पार्षद के इस्तीफा कार्ड से हैरान होकर कलेक्टर के पास जनसुनवाई में पहुंची तो कलेक्टर ने इस्तीफा प्रकरण पर कार्यवाही शुरू की। जो आज तक अंतहीन कार्यवाही ही बनी रही। प्रशासन ने इस्तीफा स्वीकार्य करने में तीन ग्रीष्मकाल (तीसरा चल रहा है) निकाल दिए। जनता पेयजल के लिए चीखी-चिल्लाई तो पार्षद ने पहले ग्रीष्मकाल से सीखा इस्तीफा कार्ड आदतन तौर पर दौनों ग्रीष्मकालों में चला। ग्रीष्मकाल में गहराने वाले पेयजल संकट के साथ ही पार्षद का इस्तीफा उसके निवास पर उसके द्वारा चस्पा कर दिया जाता है। इस बार चिपकाए गए इस्तीफे के कागज पर लिखा है वार्ड के किसी भी कार्य के लिए मुझ से संपर्क न करें। मैने इस्तीफा दे दिया है। सीएमओ से संपर्क करें। सीएमओ ठेकेदार के माध्यम से पेयजल वितरित करा रहे हैं लेकिन वार्डवासी पार्षद के इस्तीफा प्रकरण की अंतहीनता को देखकर लोकतंत्र को कोस रहे हैं। ऐसे निर्वाचित हुए पार्षद
पार्षद के चुनाव में वार्ड नम्बर 6 से खडे हुए सत्ताधारी दल के प्रत्याशी मनीष गर्ग मंजू ने कथित रूप से जनता से हाथ जोड कर और पैर छू कर आरोपित तौर पर वादा किया था कि मैं दिन रात आपकी सेवा में हाजिर रहूंगा। आप मुझे मत (वोट) का आशीर्वाद दो मैं आपको मायूस नहीं करुंगा मुझे एक मौका दो मैं स्वंय साफ सफाई और पेयजल व्यवस्था बनाने में तत्पर रहूंगा। वादे को वफा में बदलने के लिये कथित तौर पर यहां तक कहा गया कि यदि कोई सूअर गटर में गिर जायेगा और सफाई कर्मी आने में देर करेगा तो मैं स्वंय गटर में उतरकर सूअर को बहार निकाल दूंगा । यह भी दावा किया गया कि यह झूठा वादा नहीं है पूर्व में 5 नम्बर की वार्ड पार्षदी के दौरान मैं यह कर चुका हूं वार्ड की जनता ने मंजू पर भरोसा किया और जब वादा वफा करने का समय आया तो मंजू न सिर्फ सेवा कार्यो से मुकर गया बल्कि अपना इस्तीफा पूर्व कलेक्टर आर.सी. दुबे की अनुपस्थिति में उनके बंगले पर तैनात चपरासी को दे आया और उसने पेयजल संकट से जूझ रहे वार्ड वासियों से यह कहना शुरु कर दिया कि मैने तो इस्तीफा दे दिया है मुझे कोई मतलब नहीं है मैं पद छोड चुका हूं आप मेरा इस्तीफा स्वीकार करा दो । पार्षद के इस्तीफे कांड से जनता भगवान भरोसे होकर जनद्रोही पार्षद की मनमानी का शिकार हो गई । पार्षद के खिलाफ उसके निकम्मेपन के कारण वार्ड की जनता ने कई बार उसके घर पर मुखर विरोध प्रदर्शन मटके फोडकर और आपत्तीजनक शब्द उसके खिलाफ बोल कर किया लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। जनता जनसुनवाईयों में भी कई बार पहुंची लेकिन यहां से भी जनता को कोई राहत नहीं मिली। वार्डवासी पार्षद के इस्तीफे के कारण अपनी समस्याओं के समाधान के लिये वर्षो से यहां वहां भटक रहे है लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही है न तो पार्षद का इस्तीफा स्वीकार किया जा रहा है और न ही पार्षद को काम पर लगाया जा रहा है ऐसे हालात में पूरे वार्ड में हाहाकार मचा है और पार्षद के इस्तीफे प्रकरण पर जमी है घूल।
जनता से इस्तीफा का रोना रोकर पार्षद बिना काम ले रहे वेतन
काम नहीं तो वेतन नहीं की नीति वार्ड नम्बर 6 से इस्तीफा देने वाले पार्षद मनीष गर्ग मंजू पर लागू नहीं होती है। जी हां! तकरीबन दो साल पहले जिला कलेक्टर आरसी दुबे के चपरासी को बगले पर इस्तीफा देकर आए पार्षद मनीष गर्ग मंजू आज भी नगर पालिका से बिना कार्य के वेतन आरोपित तौर पर ले रहा है। विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि बिगत दो वर्ष में मंजू ने एक नहीं कई बार लगातार परिषद की बैठक में भी भाग नहीं लिया है और न ही वह वार्ड में कोई कार्य कर रहा है। हाल ही में पेयजल व्यवस्था बनाने के लिए नगर पालिका ने पार्षद से आग्रह किया जिस पर पार्षद ने हाथ खड़े करके कहा कि वार्ड में पेयजल सप्लाई ठेकेदार से ही करबाओ। जब पार्षद द्वारा कोई काम नहीं कर रहा है तो नगर पालिका वेतन क्यों दे रही है? पार्षद के काम न करने की शिकायत और उस पर कार्यवाही के लिए जनहित में पहल क्यों नहीं कर रही है? ऐसे कई सवाल हैं। जिनके जवाब जनता चाहती है।






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