वैसे सरकार की तरफ से चीन से होने वालेस्टील के आयात को एंटी डंपिंग शुल्क लगा कर काफी कम किया गया है, लेकिन
स्टील निर्मित उत्पादों के आयात पर काबू नहीं पाया जा सका है। पिछले वित्त
वर्ष के दौरान यह आयात 1.23 अरब डॉलर का था। ऑर्गेनिक रसायन दूसरा ऐसा
उत्पाद है, जिन्हें घटाया जा सकता है। पिछले वर्ष इनका 5.6 अरब डॉलर का
आयात चीन से किया गया था।
सनद रहे कि
भारत ने पिछले वर्ष चीन को 11.84 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जबकि चीन से
61.2 अरब डॉलर का आयात किया गया था। वर्ष 2013-14 में चीन के साथ भारत का
व्यापार घाटा 36.2 अरब डॉलर का था जो वर्ष 2016-17 में 51.08 अरब डॉलर का
हो गया है। चीन की तरफ से भारत से होने वाले निर्यात को बढ़ावा देने की बात
कही गई थी, लेकिन जमीनी तौर पर ऐसा नहीं हुआ है। लेकिन हाल के महीनों में
भारत ने कई चीनी उत्पादों के आयात को हतोत्साहित करने के लिए कदम उठाये
हैं।
भारत ने पिछले वर्ष चीन को 11.84 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जबकि चीन से
61.2 अरब डॉलर का आयात किया गया था। वर्ष 2013-14 में चीन के साथ भारत का
व्यापार घाटा 36.2 अरब डॉलर का था जो वर्ष 2016-17 में 51.08 अरब डॉलर का
हो गया है। चीन की तरफ से भारत से होने वाले निर्यात को बढ़ावा देने की बात
कही गई थी, लेकिन जमीनी तौर पर ऐसा नहीं हुआ है। लेकिन हाल के महीनों में
भारत ने कई चीनी उत्पादों के आयात को हतोत्साहित करने के लिए कदम उठाये
हैं।
चीन ने आरोप लगाया है कि भारत की
तरफ से उसके उत्पादों पर जितने एंटी डंपिंग शुल्क लगाये गये हैं, उतने
दुनिया के अन्य किसी भी देश ने नहीं लगाये हैं।
तरफ से उसके उत्पादों पर जितने एंटी डंपिंग शुल्क लगाये गये हैं, उतने
दुनिया के अन्य किसी भी देश ने नहीं लगाये हैं।
चीन के निवेश के साथ सौतेला व्यवहार नहीं
गृह
मंत्रालय ने इस बात से इनकार किया है कि उसकी मंशा चीन की कंपनियों से
होने वाले निवेश को हतोत्साहित करने की है। मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों
के मुताबिक, भारत सरकार ने विदेशी निवेश से जुड़े नियम पहले ही तय किये
हुए हैं और उसके अनुसार ही दूसरे देशों की कंपनियों के साथ ही चीन की
कंपनियों को निवेश की मंजूरी दी जाती है। उक्त अधिकारी ने यह भी कहा कि
सरकार की यह मंशा भी नहीं है कि चीन से होने वाले निवेश प्रस्तावों पर देरी
से फैसला किया जाए। चीन की कंपनियों ने भारत में पिछले 17 वर्षों में 1.64
अरब डॉलर का निवेश किया है। देश के टेलीकॉम व पावर क्षेत्र में चीन की
कंपनियों ने भारी निवेश किया हुआ है।
गृह
मंत्रालय ने इस बात से इनकार किया है कि उसकी मंशा चीन की कंपनियों से
होने वाले निवेश को हतोत्साहित करने की है। मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों
के मुताबिक, भारत सरकार ने विदेशी निवेश से जुड़े नियम पहले ही तय किये
हुए हैं और उसके अनुसार ही दूसरे देशों की कंपनियों के साथ ही चीन की
कंपनियों को निवेश की मंजूरी दी जाती है। उक्त अधिकारी ने यह भी कहा कि
सरकार की यह मंशा भी नहीं है कि चीन से होने वाले निवेश प्रस्तावों पर देरी
से फैसला किया जाए। चीन की कंपनियों ने भारत में पिछले 17 वर्षों में 1.64
अरब डॉलर का निवेश किया है। देश के टेलीकॉम व पावर क्षेत्र में चीन की
कंपनियों ने भारी निवेश किया हुआ है।





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