खनियाधाना :- खनियाधाना पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बडा मन्दिर मे विराजमान गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के शिष्य प्रखर वक्त़ मुनि श्री विशोक सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विधेह सागर जी महाराज जी के सानिध्य मे पार्श्वनाथ दिग्मबर जैन बडे मन्दिर जी जैन समाज के तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक आज २९ जुलाई, दिन शनिवार, श्रवण शुक्ल सप्तमी की शुभ तिथि को मोक्ष सप्तमी के रूप में बडे ही धूम धाम से मनाया गया। इस अवसर पर पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बडा मंदिरों में निर्वाण लाडू २३ किलो का चढ़ाए गया।
तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का चरित्र क्षमा की प्रतिमूर्ति है। उनके जन्म के 10 भवों से कमट का जीव प्रत्येक भव में क्रोध, हिंसा की पराकाष्ठा पर पहुँचा, परंतु पार्श्वनाथ हर भव में उसे क्षमा करते गए।
मोक्ष सप्तमी का महत्व समझाते हुए मुनि श्री विशोक सागर जी महाराज जी ने कहा कि पार्श्व प्रभु की निर्वाण बेला का पावन पर्व मोक्ष सप्तमी प्राणी मात्र को पावन पवित्र करें। सभी के दिलों को परस्पर जोड़कर हम चैतन्य प्रभु से जोड़ें, पुण्यात्मा जहाँ भी चरण रखते हैं, वहाँ दुःख रूपी अंधकार स्वतः ही प्रकाश पा जाते हैं। सभी सुविधाएँ सहज सुलभ हो जाती हैं, पारस प्रभु का स्पर्श हमको स्वर्ण नहीं पारस बना देता है।
मोक्ष की प्राप्ति का एकमात्र उपाय है मोह का परित्याग। जिस प्रकार भगवान पार्श्वनाथ ने अनेक उपसर्गों को सहन करते हुए कठिन तपस्या की एवं मोह का त्याग कर अपने जीवन में समता का निर्माण किया एवं मोक्ष को प्राप्त किया, उसी प्रकार हर श्रावक को भी मोह छोड़ना पडेगा, तभी आत्मा का कल्याण होगा।






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