Press "Enter" to skip to content

गोर गोर गणपति ईसर पूजे पार्वती पार्वती का आला टीला गौर का सोना का टीला गीत से गुंजा आई माता मंदिर प्रांगण

गोर गोर गणपति ईसर पूजे पार्वती पार्वती का आला टीला गौर का सोना का टीला गीत से गुंजा आई माता मंदिर प्रांगण*

झकनावदा/भारत रंगो भरा देश है उसमें रंग बिखेरते हैं उसके विभिन्न विभिन्न राज्य और उनकी संस्कृति हर राज्य की संस्कृति झलकती है उसकी वेशभूषा में वहां के रीति रिवाजों से और वहां के त्योहारों से हर राज्य की अपनी एक खासियत होती है जिसमें त्योहारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है उन त्योहारों में से एक त्यौहार है तीजा यह पर्व महिलाओं के लिए एक विशेष पर्व होता है जिसमें ईश्वर जी और तीजा की पूजन होती है बताया जाता है कि ईश्वर जी शंकर भगवान का रूप है भतीजा माता पार्वती का भारत का एक राज्य राजस्थान जो मारवाड़ियों की नगरी है वहां गणगौर बहुत बड़ा त्यौहार है वह इसे बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है ना केवल राजस्थान बल्कि हर वह प्रदेश जहां मारवाड़ी रहते हैं इस त्यौहार को पूरे रीति रिवाजों से मनाते हैं गणगौर दो तरह से मनाया जाता है जिस तरह मारवाड़ी लोग इस त्यौहार को मनाते हैं। उसी प्रकार मध्यप्रदेश में निमाड़ी एवं मालवा के लोग भी इसे उतने ही उत्साह से मनाते हैं त्योहार एक परंतु दोनों के पूजा के तरीके अलग-अलग हैं । जहां मारवाड़ी लोग 16 दिन की पूजा करते हैं ।वही निमाड़ी एवं मालवा में मुख्य तीन दिवसीय गणगौर मनाते हैं। उसी क्रम में ग्राम झकनावदा क्षत्रिय सीरवी समाज ब्राह्मण समाज सोनी समाज राजपूत समाज अरोड़ा समाज सहित समग्र समाज की महिलाएं इस त्यौहार को बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मना रही है। रोज सुबह शाम ईश्वर जी एवं गणगौर माता की पूजन अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु एवं परिवार की सुख शांति हेतु व्रत करती है । व  सारी महिलाएं एकजुट होकर शाम को गणगौर माता के गीत गाकर ईश्वर जी एवं गणगौर माता को अपने सिर पर बैठाकर नृत्य करती है। यह त्यौहार तीन दिवसीय रहता है। इसमें जवारा की पूजन भी होती है ,व आखरी दिन जवारा नदी में ठंडे कर माता पार्वती एवं ईश्वर जी की विदाई कर दी जाती है।

More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!