खुले आसमान में उड़ने वाले अतिविलुप्त प्रजाति में शुमार लॉन्ग बिल्ड
गिद्धों को चिड़ियाघर में कैद कर दिया गया है। इन गिद्धों को स्थानीय लोगों
ने बीमारी की हालत में चिड़ियाघर प्रबंधन को इलाज के लिए सौंपा था। वहीं, अब
सीजेडए का एक पत्र चिड़ियाघर प्रबंधन को मिला है, जिसमें कहा गया है कि
गिद्धों को ओडिशा स्थित गिद्ध प्रजनन केन्द्र में भेजा जा सकता है। जबकि
नियम के अनुसार बीमारी की हालत में रैस्क्यू कर चिड़ियाघर लाए जाने वाले
जानवर को ठीक होने के बाद उसे आजाद किया जाना अनिर्वाय है।
1990 के
दशक तक भारत में बहुतादाद में पाए जाने वाले लाल्न्ग ब्ल्डि गिद्ध इस समय
अतिविलुप्त प्रजाति में शुमार किए जा चुके हैं। इनकी तादाद 99 फीसदी तक कम
हो चुकी है। जिसके कारण इनके संरक्षण को लेकर सरकार कई योजनाओं पर कार्य कर
रही है। साथ ही हर साल इन गिद्धों की देशभर में गणना भी की जाती है।
ग्वालियर और इसके आसपास के जिलो में लॉन्ग बिल्ड गिद्ध पाए जाते हैं।
ग्वालियर में यह किले की पहाड़ियों पर अपना निवास बनाते हैं। गर्मी के दौरान
उड़ते समय कई बार ये लू लगने के कारण गिर जाते हैं। गिरे हुए इन गिद्धों को
उपनगर ग्वालियर के लोगों चिड़ियाघर प्रबंधन को इलाज के लिए सौंपा था। इलाज
के बाद जब ये गिद्ध सही हो गए, लेकिन उन्हें आजाद करने की जगह वहीं पर कैद
कर लिया। इन गिद्धों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए सीजेडए का पत्र नगर
निगम प्रशासन के पास आया है, जिसमें कहा गया है कि इन गिद्धों को ओडिशा
स्थित गिद्ध प्रजनन केन्द्र में भेजा जा सकता है।
पहली बार चिड़ियाघर में हुआ था गिद्ध के बच्चे का जन्म
भारत
में पहली बार बिना किसी सुविधा के चिड़ियाघर में गिद्ध ने अण्डा दिया था।
जिससे बच्चे का जन्म हु आ था। यह भारत में ऐसा पहला मामला था, जहां किसी
चिडियाघर में गिद्ध के बच्चे का जन्म हुआ था।
गिद्धों को चिड़ियाघर में कैद कर दिया गया है। इन गिद्धों को स्थानीय लोगों
ने बीमारी की हालत में चिड़ियाघर प्रबंधन को इलाज के लिए सौंपा था। वहीं, अब
सीजेडए का एक पत्र चिड़ियाघर प्रबंधन को मिला है, जिसमें कहा गया है कि
गिद्धों को ओडिशा स्थित गिद्ध प्रजनन केन्द्र में भेजा जा सकता है। जबकि
नियम के अनुसार बीमारी की हालत में रैस्क्यू कर चिड़ियाघर लाए जाने वाले
जानवर को ठीक होने के बाद उसे आजाद किया जाना अनिर्वाय है।
1990 के
दशक तक भारत में बहुतादाद में पाए जाने वाले लाल्न्ग ब्ल्डि गिद्ध इस समय
अतिविलुप्त प्रजाति में शुमार किए जा चुके हैं। इनकी तादाद 99 फीसदी तक कम
हो चुकी है। जिसके कारण इनके संरक्षण को लेकर सरकार कई योजनाओं पर कार्य कर
रही है। साथ ही हर साल इन गिद्धों की देशभर में गणना भी की जाती है।
ग्वालियर और इसके आसपास के जिलो में लॉन्ग बिल्ड गिद्ध पाए जाते हैं।
ग्वालियर में यह किले की पहाड़ियों पर अपना निवास बनाते हैं। गर्मी के दौरान
उड़ते समय कई बार ये लू लगने के कारण गिर जाते हैं। गिरे हुए इन गिद्धों को
उपनगर ग्वालियर के लोगों चिड़ियाघर प्रबंधन को इलाज के लिए सौंपा था। इलाज
के बाद जब ये गिद्ध सही हो गए, लेकिन उन्हें आजाद करने की जगह वहीं पर कैद
कर लिया। इन गिद्धों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए सीजेडए का पत्र नगर
निगम प्रशासन के पास आया है, जिसमें कहा गया है कि इन गिद्धों को ओडिशा
स्थित गिद्ध प्रजनन केन्द्र में भेजा जा सकता है।
पहली बार चिड़ियाघर में हुआ था गिद्ध के बच्चे का जन्म
भारत
में पहली बार बिना किसी सुविधा के चिड़ियाघर में गिद्ध ने अण्डा दिया था।
जिससे बच्चे का जन्म हु आ था। यह भारत में ऐसा पहला मामला था, जहां किसी
चिडियाघर में गिद्ध के बच्चे का जन्म हुआ था।
उड़ने लायक हो जाएंगे तो कर देंगे आजाद
सीजेडए का पत्र आया है गिद्धों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए। गिद्ध ठीक से उड़ने लायक हो जाएंगे तो उन्हें आजाद कर दिया जाएगा।
-डॉ. उपेन्द्र यादव, गांधी प्राणी उद्यान





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