करैरा। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव को अभी 1 वर्ष का समय बचा हुआ है, लेकिन राजनैतिक गलियारों में उसकी गूंज शुरु हो चुकी है। करैरा विधानसभा 25 वर्षो तक अनारक्षित सीट है। इस सीट पर पहले 5 वर्ष भाजपा के रमेश खटीक ने सफलतापूर्वक पूरे किये जबकि वर्तमान के पांच साल कांग्रेस की विधायक शकुंतला खटीक पूरा कर रही है। करैरा की जनता शांतिप्रिय व्यक्ति हमेशा पसंद करती है एवं हर बार परिवर्तन करैरा की जनता चाहती है यह बात भी किसी से छिपी नही है। पिछले चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी ओमप्रकाश खटीक करीब 10 हजार से अधिक वोटो से चुनाव कांग्रेस की प्रत्याशी शकुंतला खटीक से हार चुके है। भाजपा ने करैरा में 2 बार खटीक प्रत्याशी पर दांव खेला जिसमे एक बार उसे भारी बहुमत से जीत मिली जबकी एक बार करीब उतने ही बहुमत से हार का भी सामना करना पड़ा। भाजपा ने दोनों बार खटीक समाज पर दांव खेला यही हार का कारण भाजपा का बना जबकि कांग्रेस ने एक बार बाबू राम नरेश जाटव और दूसरी बार जनशक्ति पार्टी से कांग्रेस में आई शकुंतला खटीक को टिकिट दिया जिस पर कांग्रेस विजय हुई। ऐसे ही अबकी बार भाजपा को जाटव समाज पर भी दांव खेलना जरूरी है। क्योंकि जाटव समाज का एक बहुत बड़ा बोट बैंक भाजपा से रुष्ठ हुआ था जिसे सुभाष जाटव के द्वारा दिन रात मेहनत करके साधा। सुभाष जाटव इस समय करैरा विधानसभा में घर घर जाकर भ्रमण में लगे हुए है। सुभाष जाटव के घर-घर, गाँव-गाँव जाने से भाजपा दिन रात मजबूत होती जा रही है। सोशल मीडिया पर भी एक सर्वे रुझान के लिये लिया गया था। जिसमे सुभाष जाटव करैरा की जनता की पहली पसंद बने हुए है। करैरा की जनता बाहरी एवं थोपे हुए प्रत्याशी को पुन: पसंद करने के मूड में बिल्कुल नहीं लग रही है। करैरा की जनता में सुभाष जाटव दिन प्रतिदिन अपनी पैठ मजबूत करते जा रहे है। करैरा, सिरसौद, अमोलपठा, नरवर, मगरौनी, दिनारा, करई, दिहायला, करई ,छितरी, सोन्हर, शिलानगर, नारई, घसारई, गधाई, बढौरा, सिरसौना, टीला, खैराई, जुझाई, काली पहाड़ी, मछावली, बघेधरी, समोहा, खडीचा,आंडर,बाँसगड, ख़ैराघाट हर गाँव मे केवल सुभाष जाटव के लिये ग्रामीण जनता पसंद कर रही है। सुभाष जाटव को प्रत्याशी घोषित करने से बीएसपी का दलित वोट भी एक तरफा भाजपा की ओर मुड़ेगा ।





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