अवैध रूप से संचालित हो रहे है ईंट-भट्टे

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करैरा। नगरीय व ग्रामीण क्षेत्र में नियम ताक पर रख एक सैकड़ा से अधिक
ईंट-भट्टे बेखौफ संचालित किए जा रहे हैं। इससे एक ओर जहां अवैध उत्खनन को
बढ़ावा मिल रहा है, वहीं लगातार फैल रहे प्रदूषण से आसपास के लोगों को रह
पाना मुश्किल हो रहा है। विभागीय अधिकारी न तो जिम्मेदारी लेने तैयार है और
न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की जहमत उठाने की, जबकि भारतीय वन
अधिनियम के तहत यह गंभीर अपराध है, वहीं भू-राजस्व संहिता का भी उल्लंघन
है।
अवैध खुदाई से हो गईं गहरी खाइयां
ग्रामीण क्षेत्र में वन
भूमि, शमशान भूमि व राजस्व भूमि सहित नदी-नालों किनारे स्थित मिट्टी की
खदानों में मशीनों से इस कदर खुदाई कर दी गई है कि जगह-जगह गहरी खाइयां साफ
दिखाई दे रही हैं। करैरा की महुअर नदी किनारे मशीनें लगाकर खुदाई करने से
नदी के तटों का अस्तित्व समाप्त हो रहा है। खेराघाट बघेदरी ईद घाट में
जगह-जगह गहरी खाई हो गई हैं। विगत कुछ महीने पहले सिलरा ग्राम में रेत
निकालते समय खदान के धसकने से भूपसिंह कुशवाह की मौके पर ही मौत हो गई थी।
इससे पहले ग्राम दिनारा में भी मिट्टी की खदान धसकने से एक महिला की
दर्दनाक मौत का मंजर सामने आने के बावजूद अवैध खुदाई का सिलसिला थमने का
नाम नहीं ले रहा है। परिणामस्वरूप अनेक गांवों में आम रास्ते भी खाइयों में
तब्दील हो गए हैं।
प्रदूषण से लोगों को आ रही सांस लेने में दिक्कतें
करैरा
नगर के अलावा उप जेल के पास खेराघाट के कुम्हारपुरा में एक दर्जन से अधिक
स्थानों पर नदी-नालों किनारे अवैध उत्खनन कर न केवल ईंटों का धड़ल्ले से
निर्माण किया जा रहा है, बल्कि जंगलों की अवैध कटाई कर ईंटों को पकाया जा
रहा है। इससे यहां रहने वाले लोगों को सांस लेने भी परेशानी आ रही है।
दिन-रात प्रदूषण की मार के चलते ग्रामीण श्वांस, नाक व खांसी संबंधी
बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। करैरा नगर में पूर्व में भी ईंट भट्टों से
फैलने वाले प्रदूषण की शिकायत अधिकारियों को की जा चुकी है, लेकिन
अधिकारियों ने कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई, जिससे यह अवैध कारोबार
निर्वाध गति से निरंतर चल रहा है।
सरकारी निर्माण कार्यों में प्रयोग हो रही हैं लोकल ईंट
करैरा
जनपद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत, हाजिनगर, वनगंवा, लंगूरी, बांसगढ़,
आढर, लालपुर, छिरारी, खेराघाट, सिल्लारपुर, डुमघना, कलोथरा, नयाअमोल,ा
सिरसौद, सलैया, अमोला क्रेसर, पारगढ़, राजगढ़, अमोलपठा, सिलानगर, नारही,
बघरा, साजौर, बरौदी, सिरसोना, बड़ौरा, जुझाई, रहरगवा, टीला, खेराई, चिनोद,
श्योपुरा, करौठा, चौका, बहादुर पुर, खोआ, काली पहाड़ी, थनरा, अलगी, आवास,
डामरौंन कला, डामरौंन खुर्द, दिनारा, छितीपुर, बैसोराकला, कुचलौन, कुमरौआ
आदि ग्राम पंचायतों में किए गए निर्माण कार्यो में लोकल इर्ट लगाकर लगाई जा
रही हैं। अधिकांश गांवों में ईटों का निर्माण करने वाले पेशेवर कुम्हार न
होते हुए ईट-भट्टा के लिए ये शर्तें जरूरी हैं।
प्रमुख शर्तें -ईट भट्टा लगाने के लिए स्थान नगरीय क्षेत्र हो या ग्रामीण बस्ती से दूर होना चाहिए।
-पर्यावरण विभाग की मंजूरी होना आवश्यक
-मिट्टी उत्खनन के लिए खनिज विभाग या राजस्व विभाग की अनुमति
वन विभाग की स्वीकृति भी आवश्यक
-पेशेवर कुम्हारों को नियमों में छूट है।
इनका कहना है
अगर
कोई लिखित रूप से शिकायत करे तो हम जरूर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में
लगे ईट भट्टी संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, साथ ही अगर बिना प्रदूषण
विभाग के ईंट भट्टा लगा है, वह गलत है।
सीबी प्रसाद, एसडीएम करैरा।