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कोलारस उपचुनाव में सीएम की आदिवासियों पर मेहरबानी पड़ सकती है भारी अन्य समाज की उपेक्षा से भाजपा से दूर हो सकता है एक बड़ा वोट बैंक गिलगवांचक्क विकास से कोसों दूर, फिर भी नहीं ली सुध चार साल में कांग्रेस नहीं दिला सकी गांववालों को कोई लाभ

शिवपुरी। कोलारस विधानसभा में भाजपा सरकार कुछ ज्यादा ही मेहरबान नजर आ रही है, अब यहां सवाल यह उठता है कि यदि कोलारस में उपचुनाव नहीं होते क्या भाजपा सरकार इस तरह अपनी मेहरबान होती? इसका सीधा सा जबाव नहीं है क्योंकि अगर मेहरबान होती तो पिछले चार साल में कोलारस में विकास क्यों नहीं हुए। वहीं दूसरी ओर बात करें कांग्रेस की तो पिछले चार साल से कोलारस में कांग्रेस के विधायक काबिज थे, लेकिन कोलारस की ग्राम पंचायत गुढ़ा एक गांव जो जाटव बाहुल्य है, यहां कांग्रेस द्वारा कोई भी विकास कार्य नहीं कराया गया है। अभी उपचुनाव की तारीख का ऐलान नहीं हुआ है फिर भाजपा ने पूरी ताकत से चुनाव प्रचार चालू कर दिया है जबकि अभी कांग्रेस अभी सिर्फ वेट एण्ड वाच का गेम खेलती दिखाई दे रही है। इस दौरान सरकारी मशीनरी का भी जमकर दुरुपयोग देखने को मिल रहा है। विगत दिनों खबरें सुनने में आई थीं कि सीएम की सभा के लिए सरपंचों को भीड़ जुटाने के टारगेट दिए गए थे और कुछ सरपंचों दबी जुवां से इस बात को स्वीकार भी किया था। राजएक्सप्रेस की टीम द्वारा जब कोलारस विधानसभा के गांव में जाकर भ्रमण किया तो स्थिति यह निकलकर सामने आई कि क्षेत्र में शासन की सहरियाओं मेहरबानी कहीं उसे उपचुनाव में भारी न पड़ जाए क्योंकि इससे समाज के अन्य वर्गों में रोष देखा जा रहा है। 

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…फिर क्यों नहीं देती भाजपा किसी सहरिया को टिकिट

गांववासियों का कहना था कि एक सरकार सहरियाओं पर इतनी मेहरबान तो फिर वह किसी सहरिया को ही टिकिट क्यों नहीं दे देती। जब उनसे पूछा गया कि वह किसी निचले तबके के व्यक्ति को टिकिट दिया जाए तो वह वोट देंगे। तो उनका साफ कहना था कि यदि किसी निचले तबके के व्यक्ति को टिकिट दिया जाएगा तो वह भाजपा को वोट देंगे। 

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गांववालों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ

कोलारस उपचुनाव से पूर्व प्रदेश सरकार के मुखिया द्वारा कोलारस क्षेत्र में लाखों करोड़ों की योजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास कर क्षेत्र के लोगों को रुझाने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कोलारस की ग्राम पंचायत गुढ़ा का एक गांव गिलगवांचक्क को शासन की तमाम योजनाओं में से किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला है। जाटव बाहुल्य इस गांव में गांववासियों को पानी, सड़क, बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं के लिए जूझना पड़ रहा है। पंचायत के सरपंच एवं सचिव द्वारा गांव में कोई विकास नहीं कराया गया है। बकौल गांववासी सरपंच चुनाव जीतने के बाद एक बार भी गांव में नहीं आए हैं। इसके अलावा पंचायत के सचिव द्वारा हमारे कार्य करने के ऐवज में पैसों की मांग की जाती है। बॉक्स

शासन पर भेदभाव के लगे आरोप

ग्रामीणों का कहना था कि हम जाटव समाज के लोग हैं और उनके द्वारा वोट देने के बाद भी यही समझा जाता है कि उन्होंने बहुजन को ही वोट दिया है। अब ऐसी स्थिति में वोट डालना और न डालना बराबर है। ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में आदिवासी वोटरों की संख्या 37 हजार के करीब है जबकि उनकी संख्या 25 हजार के करीब है। जनप्रतिनिधियों द्वारा ज्यादा तबज्जो आदिवासियों को दी जा रही है। पिछले चार साल में उनके गांव में उनकी समस्याओं को सुनने के लिए कोई नहीं आया। 

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सचिव पर लगाए रिश्वत के आरोप

पंचायत सचिव भूपेन्द्र यादव पर ग्रामीणों ने आरोप लगाए कि सचिव द्वारा 1000 से 1500 रुपए लेने के बाद ही उनके लिए शौचालय मंजूर करवाए। अभी भी गांव में बहुत से लोगों के शौचालय नहीं बन पाए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच व सचिव द्वारा उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है। गांव में बहुत से लोग झोंपडिय़ों में रह रहे हैं इसके बाद भी उन्हें कुटीर नहीं मिल रही है। सचिव के यहां पर कई चक्कर लगा चुके हैं, सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। एक ग्रामीण ने महेश ओझा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके द्वारा उन्हें बीपीएल राशनकार्ड बनवाने के कलिए तीन साल पहले 8 हजार रुपए दिए गए थे, लेकिन आज तक उनका राशनकार्ड नहीं बना।

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दो से तीन किमी. दूर से लाते हैं पानी

गांव में एक पुराना हैंडपंप है वह भी खराब पड़ा हुआ है। पीने के पानी के लिए दो से तीन किमी. की दूरी पर निजी बोरों से पानी भरकर लाना पड़ता है। इसके बॉक्स

एक दर्जन विधवा महिलाएं, नहीं मिलती विधवा पेंशन

महिलाओं ने बताया कि गांव में करीब एक दर्जन विधवा महिलाएं हैं फिर उन्हें विधवा पेंशन का लाभ नहीं दिया जा रहा है, इसके अलावा गांव वालों को वृद्धा पेंशन का भी लाभ नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया किया कि उनके कायों को जातिवाद के चक्कर में रोक दिया जाता है।

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