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एक करोड़ का पैकेज छोड़ शैलेष बने थे ‌जैन मुनि वीरसागर

योगेन्द्र जैन (पोहरीं)हांसी/हिसार-उपभोक्तावाद संस्कृति की चकाचौंध में जहां युवा लाखों और करोड़ों रुपए के पैकेज की ओर भाग रहा है। एशोआराम और भौतिक वस्तुओं की चाह में रात-दिन एक किए हुए है। वहीं एक ऐसा भी युवा था जिसने आत्म उत्थान और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए एक करोड़ रुपये के पैकेज को पल भर में त्याग दिया। यह शख्स था शैलेष जैन जो वर्तमान में दिगंबर मुद्रा धारण कर मुनिश्री वीरसागर महाराज बना। उन्होंने आचार्यश्री 108 विद्यासागर महाराज से दीक्षा ग्रहण की। मुनिश्री वीरसागर यहां हांसी में दो दिगंबर जैन मुनियों के साथ ससंघ चातुर्मास कर रहे हैं। शुक्रवार को मुनि श्री से विशेष बातचीत की। वर्ष 2004 में वीरसागर महाराज बॉम्बे के स्टॉक एक्सचेंज में कन्सलटेंट फर्म में सर्विस पर थे। तब वह 1 करोड़ रूपए के सालाना पैकेज पर कार्य कर रहे थे। वहीं उनके छोटे भाई निलेश जैन बॉम्बे में रिलायंस जियो के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट है।
वर्ष 1994 में नागपुर से शैलेष ने कैमिकल इंजीनियरिंग का कोर्स किया। इसके बाद उन्होंने एमबीए इन फाइनेंस व चार्टर्ड फाइनेंशनल अकाउंटेट (सीएफए) किया। इसके बाद वह बॉम्बे में एक कन्सलटेंट फर्म में सर्विस पर लगे। 31 वर्ष की आयु में उन्हें वैराग्य हुआ और आत्म उत्थान की लगन जागी।

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