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आपके सुरक्षाकर्मी लड़ाई के दौरान क्यों बन जाते हैं भीड़ का हिस्सा

जिला चिकित्सालय के भ्रमण के दौरान एडीएम माथुर ने सीएस से किया सवाल,
जिला चिकित्सालय निर्माण एवं सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक अमले ने किया भ्रमण

शिवपुरी। जिला कलेक्टर, अपर कलेक्टर सहित प्रशासनिक अमले ने आज जिला चिकित्सालय का भ्रमण कर न सिर्फ वहां चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण किया, बल्कि अन्य निर्माण कार्यों में आ रही समस्याओं के निपटारे के लिए भी आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं को लेकर काफी गंभीर दिखे और उन्होंने सभी अधीनस्थों से अस्पताल निर्माण में आ रही समस्याओं को तुरंत निपटाने को कहा। इस दौरान अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आई चर्चा में अपर कलेक्टर नीतू माथुर ने सिविल सर्जन डॉ. गोविंद सिंह से कहा अस्पताल में आपका सुरक्षा अमला क्या करता है? जब भी कोई घटना दुर्घटना होती है तो वह तमाशबीन की तरह ही भीड़ का हिस्सा बन जाता है। ऐसी सुरक्षा व्यवस्था के क्या फायदा? क्यों नहीं आप ऐसे सुरक्षाकर्मियों को हटाकर हट्टे-कट्टे जवानों की तैनाती करते? अपर कलेक्टर के इन तीखे सवालों के सिविल सर्जन पर कोई जबाव नहीं थे।
पूर्व से निर्धारित कार्यक्रम के तहत आज कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव, अपर कलेक्टर नीतू माथुर, एसडीएम रूपेश उपाध्याय सहित पीडब्ल्यूडी, नगरपालिका एवं सीएमएचओ खरे जिला चिकित्सालय पहुंचे और इन्होंने सर्वप्रथम जिला चिकित्सालय में बन रहे 300 बिस्तरीय अस्पताल की बिल्डिंग का निरीक्षण किया, तदोपरांत पूरा अमला परिसर के उस हिस्से में गए, जहां बने स्टाफ क्वाटर आगे होने वाले निर्माण में बाधा बन रहे थे। इस संबंध में कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों से सवाल जबाव करने के बाद कहा कि इसमें रहने वाले कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से नोटिस देकर क्वाटर खाली करने को कहा जाए और हर हाल में 31 मार्च से पूर्व इन क्वाटरों को खाली कराकर संंबंधित विभाग को सौंप दी जाए जिससे संबंधित एजेंसी 1 अप्रैल से उक्त हिस्से में कार्य प्रारंभ कर सके। अस्पताल प्रबंधन द्वारा बार-बार सुरक्षा का पहलू उठाए जाने पर अपर कलेक्टर नीतू माथुर ने सिविल सर्जन डॉ. गोविंद सिंह को सवालों के घेरे में लेते हुए उनसे कहा कि अब तक अस्पताल में हुए सभी विवादों के दौरान यहां तैनात सुरक्षाकर्मी सिर्फ भीड़ का हिस्सा नजर आते हैं। वे किसी भी लड़ाई को रोकने अथवा दोषी को पकडऩे का कोई प्रयास नहीं करते। ऐसी सिक्योरिटी का क्या फायदा? यह कहते ही सिविल सर्जन न सिर्फ बगलें झांकने लगे, बल्कि सुरक्षाकर्मियों की कम संख्या का रोना रोने लगे। सवाल यह उठता है कि यदि सुरक्षाकर्मियों की कम संख्या सुरक्षा करने मेें नाकाम है तो सिर्फ ऐसी सुरक्षा की क्या आवश्यकता? इस सवाल जबाव को सुन रहे कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव भी स्वयं को नहीं रोक पाए और उन्होंने अपर कलेक्टर माथुर की बात से अपनी सहमति जताते हुए कहा हां यह सहीं बोल रहीं हैं चार माह पूर्व हुए एक झगड़े की वीडियो हमने देखी थी उस वीडियो में सुरक्षाकर्मी कहीं दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहे थे। कलेक्टर सिविल सर्जन को लगभग निर्देश देते हुए कहा कि सुरक्षाकर्मी ऐसे रखे जाने चाहिए जो कुछ कर सकें। कलेक्टर और अपर कलेक्टर की बातों को सुन सिविल सर्जन ने लाख सफाई देने का प्रयास किया, लेकिन उनकी दी हुई सफाई पर किसी ने कोई गौर नहीं किया और वहां मौजूद अधिकांश लोग अपर कलेक्टर की बात से सहमत दिखाई दिए।

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