खनियाधाना । खनियांधाना से 5 किमी. की .दूरी पर ग्राम गनेशखेडा मे चल रही भव्य संगीतमय श्री मदभागवत कथा के छटवे दिन कथा व्यास ( पं श्री प्रमोद कुमार शास्त्री ) मामौनी खुर्द वालो ने महारास की कथा का वर्णन करते हुए वताया की जीव और परमात्मा का मिलन ही महारास है गोपी कोई स्त्री नही है , गोपी ही जीव आत्मा है और श्री कृष्ण ही परमात्मा है काम को जो पराजित करदे उसे ब्रह्म कहते है तथा काम जिसे मारदे उसे जीव कहते है काम का अर्थ क्या है ” कम,,आम,, ,,कच्चा,, काम जिसमें कच्चा सुख है उसे काम कहते है काम पर यदि विजय प्राप्त करना है तो स्त्री की आंख और मुख की ओर मत देखो इसमे नारी जाति की निंदा नही है नारी की आंख और मुख मे जो भीषण कामदेव बैठा है उसकी निंदा है, यदि दूसरे की नारी की तरफ देखना है तो उसके चरणों की ओर देखो अवश्य ही काम पर विजय प्राप्त कर लोगे आगे मथुरा मे श्री कृष्ण ने अभिमान रूपी कंस को मार दिया तथा भगवान श्री कृष्ण और रूक्मणी विवाह की कथा का वर्णन करते हुए वताया कि तीन चीजो से भगवान की प्राप्ति होती है,,प्रतीक्षा ,परीक्षा,समीक्षा,से जेसे रुकमणी और पितामह भीष्म तथा सवरी को प्रतीक्षा से ही भगवान की प्राप्ति हुई कथा मे सुंदर झांकी लगाई गई जिसमे कथा के मुख्य यजमान अमोल सिंह वघेल ने भगवान कृष्ण और व माता रुक्मणी का पूजन किया यह कार्यक्रम समस्त ग्राम गनेशखेडा वासियों के द्वारा किया जा रहा है।






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