अनिल दुबे की कलम से…
श्योपुर,02 सितंबर 2017
श्योपुर ।।श्योपुर शहर में फूल डोल ग्यारस के मौके पर सड़को पर निकलने बाले भगवान के विमानों के साथ चल रहे कर्तव्य दिखाने बाले युवक खुले आम अपनी और कई लोगो की जान जोखिम में डालते हुए नजर आये और पुलिस की आँखों के सामने ये जान जोखिम बाले तमाशे चलते रहे और पुलिस भी ये तमाशा तमाशावीन होकर देखती रही खास बात ये है कि ये पुलिस के बड़े अधिकारियों की आँखों के सामने होता रहा और किसी ने भी इस तमाशे को रोकने तक की कोशिश नहीं की,सड़क पर चलने बाले लोग सिर्फ आस्था के नाम पर अपनी जान जोखिम में डालते रहे।शहर के मुख्य रास्तो पर सरे आम सड़क पर ये जान हथेली पर रहने बालो का खेल चलता रहा और श्योपुर पुलिस के जिमेदार मूक दशक बनकर खामोश होकर अपनी ड्यूटी करती रही,लोगो के लिए ये तमाशा मनोरंजन भरा था कई नाबालिक काम उम्र के छोटे छोटे बच्चे खुले आम हथियार घुमात्र रहे तो कही कई युवक सड़क पर किलो से जड़ी हुई लकड़ी की तख्ती बाले पटे पर लेट जाते है और बाइक सवार उस युवक के ऊपर से बाइक निकालते हुए जोखिम भरा स्टन्ट करता है लोग ताली बजाकर इस तमाशे का मजा लेते है ये खेल एक वार नहीं बल्कि 2 से 3 घंटे तक ऐसे ही कई वार श्योपुर के खाकी बालो की नजरो के सामने चलता रहा,यही नहीं इसी तरह दूसरी और सड़क पर तीन से चार लोग लेट कर अपने ऊपर से बाइक पर बैठे दो लोगो की बाइक निकलवाते है,जिला प्रशाशन के अधिकारी भी ये देखते रहे ना तो किसी भी प्रशाशनिक जिम्मेदार और ना ही किसी पुलिस अफसर ने इस तरह के जान जोखिम बाले खेलो को गंभीरता से लिया या कहे की जिम्मेदारों के सामने कई लोग अपनी जान पर कई बार जोखिम भरे दाव लगाते रहे लेकिन जिमेदार लापरवाह बने रहे या फिर ये कहे की पुलिस और प्रशाशन के लोग किसी हादशे के बाद ही कोई कार्यवाही करने के इन्तजार में थे,लेकिन सवाल यही है कि लोग धार्मिक जुलूसों में आस्था के नाम पर इस तरह के कर्तव्यों को करके अपनी और कई लोगो की जान जोखिम में डालते है और जिन्हें उन्हें इस तरह के खेलो को करने से रोकना चाहिए वो जिम्मेदार भीड़ में आँखों पर पट्टी बांधे खड़े रह देखते रहते है





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