
उन्नाव बालाजी। भारतीय संस्कृति में एक सूत्र वाक्य प्रचलित है तमसो मा ज्योतिर्गमय इसका अर्थ है अँधेरे से उजाले की ओर जाना। इस प्रक्रिया को वास्तविक अर्थों में पूरा करने के लिए शिक्षक की बड़ी भूमिका होती है, ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी दतिया जिले में उन्नाव बालाजी में रहने वाले सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य श्यामबाबू पाराशर का 74 वर्ष की आयु में दुखद निधन हो गया, जिन्होंने जीवनभर अपने कंधों पर शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाने की जिम्मेदारी संभाली। वह धर्म में भी काफी अस्था रखते थे और उन्होंने रामगढ़ काली माता मंदिर में पुजारी के रूप में माता को समर्पित किया। उनके निधन की खबर से उनाव में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार उनके निजी कृषि फार्म उनाव पर किया गया। अंतेष्टि को मुखाग्नि उनके बड़े सुपुत्र पुलिस उपनिरीक्षक रविंद्र कुमार पाराशर ने दी। उनकी अंतिम विदाई में कस्बा उनाव के जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में मौजूद रहे। वह उनके पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए उनके तीन सुपुत्र उप निरीक्षक रविन्द्र कुमार पाराशर, आरक्षक सुरेन्द्र पाराशर, आरक्षक देवेन्द्र पाराशर हैं।






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