वकीलों को दिया धक्का, मामला ग्वालियर हाईकोर्ट का
ग्वालियर। गुरूवार को ग्वालियर हाईकोर्ट की एकलपीठ में उस समय हंगामा हो गया जब करैरा एसडीओपी बीपी तिवारी ने कोर्ट की टिप्पणी से गुस्सा होकर जज को ही देख लेने की धमकी दे डाली, इस दौरान श्री तिवारी को वकील एवं सुरक्षा गार्डों ने रोकना चाहा तो उनके साथ भी धक्कामुक्की कर दी। इसके बाद एसडीओपी को कोर्ट के बाहर लाया गया। इसके तुरंत बाद कोर्ट ने डीआईजी और एसपी को कोर्ट में तलब किया गया जिन्होंने बिना शर्त न्यायामूर्ति से माफी मांगी। एसडीओपी ने भी लिखित माफी, जिस पर आज विशेष सुनवाई होगी।
उल्लेखनीय है कि 2011 में शिवपुरी जिले के करैरा थाने की पुलिस बदमाशों को पकडऩे गई थी इस दौरान पुलिस की ओर से फायर किए गए जिसमें एक व्यक्ति के यहां गोली लग गई जिसमें पुलिसकर्मी राजवीर सिंह व एक अन्य को दोषी पाते हुए उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज किया गया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी करैरा पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की। इसी के चलते कोर्ट द्वारा करैरा पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
जानें कोर्ट ने अपने आर्डर में क्या लिखा?
एक केस की सुनवाई के दौरान केस की जांच में पुलिस द्वारा की जाने वाली लापरवाही पर जैसे ही कोर्ट ने टिप्पणी की, पीछे बैठे बीपी तिवारी उठे और बोले कि आपने मेरी तौहीन की है। अभी तक मैं चुप हूं, लेकिन अब मैं देख लूंगा। बीपी तिवारी का रवैया इतना आक्रामक था कि बार काउंसिल के सदस्यों ने उन्हें रोका चाहा, लेकिन वह जोर-जोर से चिल्लाते रहे। उन्होंने वरिष्ठ सदस्य डीआर शर्मा, प्रदीप कटारे और कोर्ट पीएसओ को भी धक्का दिया। वह लगातार कह रहे थे अब तक चुप रहे, लेकिन अब एक्शन लूंगा। कोर्ट ने सरकारी वकील प्रमोद पचौरी को निर्देशित किया कि बीपी तिवारी को सुनवाई पूरी होने तक अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय में ले जाया जाए। बीपी तिवारी के कृत्य से कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंची है। यह कोर्ट की अवमानना है। कोर्ट आदेशित करता है कि शुक्रवार को इस केस को प्राथमिकता से लिस्ट किया जाए, जिससे यह तय हो सके कि बीपी तिवारी का कृत्य माफी देने योग्य है नहीं।
जीएस अहलूवालिया, जज
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