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शुद्ध चिंतन से होता है मनुष्य के चरित्र का निर्माण : सिद्धगिरी स्वामी जी महाराज

शिवपुरी-जिस
मनुष्य का शुद्ध आचरण ना हो वह कभी शुद्ध चरित्र का निर्माता नहीं हो
सकता, जबकि शुद्ध चिंतन से ही शुद्ध चरित्र का निर्माण होता है, काम,
क्रोध, लोभ, मोह, माया ये पांच तत्व ऐसे है जिससे मनुष्य को दूर रहना
आवश्यक है, यदि काम हावी हो गया तो मनुष्य का जीवन व्यर्थ गर्त में चला
 जाता है, क्रोध पर नियंत्रण ना हो तो अपराध हो जाता है, लोभ के लालच में
मनुष्य कभी भी गिर जाता है पर लोभ नहीं छोड़ता, मोह कभी किसी से ना करें
क्योंकि यह शरीर एक दिन छोड़कर जाना है इसलिए मोहरूपी लोभ ना पालें, माया
इतनी हो कि हम सद्कल्याण में लगा सके और अपने जीवन को बेहतर ढंग से जी सके,
यदि इन पांच सूत्रीय वाक्यों के भावों को समझ लिया तो मनुष्य का जीवन सफल
हो जाएगा। यह आर्शीवचन और शुद्ध मानव चरित्र का निर्माण कैसे किया जाए का
मार्ग प्रशस्त किया श्री दक्ष पंथ संप्रदाय के शंकराचार्य व अ.भा.हिन्दू
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिद्धगिरी स्वामी जी महाराज ने जो अल्प प्रवास
पर शिवपुरी आए और स्थानीय प्रजापति समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हरज्ञान
प्रजापति के निवास पर आयोजित शुद्धि यज्ञ में भाग लेते हुए अपने उद्गार
प्रकट कर रहे थे। इस अवसर पर यज्ञ की महिमा के बारे में यज्ञाचार्य योगेश
शर्मा ने बताया कि यज्ञ हरेक घर-परिवार में आवश्यक है लेकिन यह यज्ञ तभी
सफल होता है जब इसमें देवपूजा, संगतिकरण व दान का आह्वान हो, जिसमें
देवपूजा में देवताओं का आह्वान, संगतिकरण में सत्संग का ज्ञान व दान बिना
दान किए कोई भी यज्ञ पूर्ण नहीं होता इसलिए दान अवश्य करें, दान का
तात्पर्य गौ दान है पूर्व काल में गाय के सिंगों को पूजाकर दान किया जाता
है इसके अलावा दान में अपनी इच्छित वस्तु को त्यागना भी दान के समान ही है।
इस अवसर पर शुद्धि हवन यज्ञ में हरज्ञान प्रजापति सपत्निक, युवा व्यावसाई
दाताराम प्रजापति व रमेशचंद गुप्ता, सरनाम सिंह यादव, धरमू प्रजापति,
बाबूलाल, रामवृज, अमर सिंह, मुरारी लाल कुशवाह, अजय सक्सैना, अजय चौहान,
कृष्णा प्रजापति आदि ने भाग लिया और हवन यज्ञ पश्चात प्रसाद वितरण किया
गया।
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