भोपाल। कम बारिश की वजह से मप्र की 23 जिलों की 127 तहसीलें सूखाग्रस्त हैं। ऐसे में सूखे से निपटने के लिए मप्र ने व्यापक पैमाने पर जल संरक्षण की कार्ययोजना बनाई है। पिछले दिनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि जिलों में चेक डैम, स्टाप डैम बनाने और बोरी-बंधान के काम शुरू किए जाएं। मप्र में आने वाले दिनों में जहां जितना पानी है, उसे संरक्षित करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। साथ ही इस साल जुलाई में नदी किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाएंगे, जिससे नदियों का जलप्रवाह बरकरार रहे।
अप्रैल से शुरू होगा जलाभिषेक अभियान
राज्य सरकार मप्र में दो अप्रैल से एक बार फिर जलाभिषेक अभियान शुरू कर रही है। इस अभियान के जरिए पूरे प्रदेश में एक लाख से ज्यादा तालाबों का निर्माण किया जाएगा। ताकि बारिश के दिनों में पानी को संरक्षित किया जा सके। इन तालाबों का निर्माण मनरेगा योजना के तहत होगा। वहीं पूरी तरह सूख चुकी कई नदियों को पुनर्जीवित करने का काम भी शुरू किया जाएगा।
पार्वती और कालीसिंध जुड़ेंगी नर्मदा से
यह माना जा रहा है कि नर्मदा-पार्वती और नर्मदा-कालीसिंध लिंक परियोजना का काम इस साल शुरू हो जाएगा। नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना की तरह नदी जोड़ने वाली इन परियोजनाओं से सिंचाई सुविधा तो बढ़ेगी ही, साथ ही मालवा क्षेत्र में लगातार नीचे जाते भू-जल स्तर और सूखे की समस्या से निजात मिलेगी। एक अध्ययन में कहा गया था कि मालवा रेगिस्तान बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना से मालवा में सूखे की समस्या का काफी हद तक निजात मिली है। 14 हजार करोड़ रुपए की नर्मदा-कालीसिंध और 7500 करोड़ रुपए की नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना का इस साल काम शुरू होने के आसार हैं। वहीं केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट को भी इस साल गति मिल सकती है। इससे बुंदेलखंड को सूखे से निपटने में मदद मिलेगी।
प्रदूषण से बचाने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
नर्मदा को प्रदूषण से बचाने के लिए नर्मदा किनारे बसे 16 शहरों में 1400 करोड़ रुपए की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने हैं। इनमें से कुछ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अगले कुछ महीनों में शुरू हो जाएंगे।






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