योगेंद्र जैन पोहरी-शिवपुरी जिले से 35 कि. मी दूर मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित तहसील पोहरी जो कभी भुखमरी के चलते देश व प्रदेश में चर्चित रही थी। इस बार फिर शिक्षा विभाग के नए कार्यनामों के चलते चर्चा में है। विद्यालय में शिक्षकों की कमी के चलते प्रतिवर्ष अतिथि शिक्षकों की भर्ती विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को संचालित रखने के लिए मध्य प्रदेश शासन का शिक्षा विभाग करता है और इस मामले में पोहरी हमेशा से भाई भतीजेवाद के लिए चर्चित रहता है। खासबात यह है कि शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होती है। इस बार मध्य प्रदेश शासन द्वारा अतिथि शिक्षक की भर्ती ऑफलाइन की जगह ऑनलाइन करवाने के आदेश जारी किया गए जिसके बड़ी संख्या में अभ्यार्थियों द्वारा ऑनलाइन आवेदन किये गए, लेकिन तीन माह गुजरने के बाद भी भर्ती नहीं की गई, लेकिन सूत्रों से खबर सामने आ रही है उससे के अनुसार शिक्षा विभाग के मठाधीशों द्वारा इसे कमाई का जरिया बनाने एवं रिश्तेदारों को फायदे पहुंचाने के लिए पोहरी में चोरी छुप के अतिथि शिक्षकों की भर्ती कर डाली। अब यहां सवाल यह उठता है कि जब आवेदन ऑनलाइन हुए थे तो भर्ती ऑफलाइन कैसे कर दी गई। बताया जाता है कि पोहरी तहसील में शिक्षा विभाग में ही कुछ लोग पैसे लेकर अतिथि शिक्षकों की भर्ती की गई है जबकि छर्च क्षेत्र के विद्यालय में हर वर्ष अतिथि शिक्षकों की भर्ती में लाखों का खेल विकास खण्ड शिक्षक अधिकारी, बीआरसीसी, बीएसी द्वारा खेला जाता है। यहां बताना होगा कि जब अधिकारियों द्वारा स्कूलों का निरीक्षण किया जाता है तो उस दौरान भी अतिथि शिक्षकों की भर्ती को नहीं दर्शाया जाता है इस प्रकार जिले के शिक्षा अधिकारियों को भी इस प्रकार गुमराह किया जाता है।
अतिथि शिक्षक भर्ती से ग्रामीण अनभिज्ञ-जब छर्च क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं से जानना चाहा कि उनके द्वारा अतिथि शिक्षक के आवेदन क्यों नहीं किया था? तो उनका कहना था कि उनके द्वारा ऑनलाईन आवेदन किया था और अभी ऑनलाईन भर्ती नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर छर्च क्षेत्र के विधालयो में कागजों में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण कर लिया गया है। इस प्रकार बेरोजगारों के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
प्रतिवर्ष होता है लाखों के बारेन्यारे-पोहरी तहसील में यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि इसी तरह के कारनामे प्रतिवर्ष होते हैं और अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में विभाग के अधिकारियों से लेकर बाबुओं तक लाखों के बारेन्यारे किये जाते हैं। साल के अंत में इन अतिथियों के पैसे सांठगांठ के माध्यम से आहरित कर लिए जाते हैं।
भर्ती प्रक्रिया की सूचना के अधिकार के तहत नहीं मिलती जानकारी-विभाग के अधिकारियों अपनी मनमर्जी और हठधर्मिता पर इस कदर हावी हैं कि जब अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत उनसे मांगी जाती है तो उनके द्वारा जानकारी नहीं दी जाती है। इस प्रकार सूचना के अधिनियम के तहत जानकारी नहीं देता अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन इन्हें किसी का खौफ नहीं है।
निष्पक्ष जांच की जाए तो होगा बड़ा खुलासा-यदि पोहरी तहसील में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की यदि पिछले वर्षों की निष्पक्ष जांच की जाए तो बड़ा काला कारनामा सामने आ सकता है। इस दौरान सैंकड़ों अतिथि शिक्षक ऐसे निकलेंगे जो क्षेत्र में मौजूद नहीं हैं, बल्कि वह तो बाहर रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। खासबात यह है कि यह आमजन नहीं, बल्कि विभाग में पदस्थ लोगों की बहन, बेटियां, भतीजे, रिश्तेदार निकलेंगे।
इनका क्या कहना है
मेरे द्वारा बाग़लोंन,महदेवा, छर्च आदि विद्यालय में आवेदन देने गया पर ऑनलाइन भर्ती बोलकर आवेदन नही लिया अब भर्ती ऑफ लाइन कर दी अपने रिश्ते दरों को भर्ती कर लिया
हितेश
हर वर्ष में आवेदन करता हु मेरे पास डी. एड है फिर भी मुझे अतिथि नही बनाया बोले ऑनलाइन भर्ती होगी और ऑफ लाइन भर्ती कर ली
गिर्राज
जिला शिक्षाधिकारी को फ़ोन लगाया गया बहुत बार फ़ोन लगने के बाद भी फ़ोन रिसीव नही किया गया






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